क्या नोएडा में बड़ा ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क पकड़ा गया?

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क्या नोएडा में बड़ा ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क पकड़ा गया?

सारांश

नोएडा में सीबीआई ने एक बड़े ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर उनसे लाखों डॉलर की ठगी कर रहा था। जानें इस ऑपरेशन की पूरी कहानी और सीबीआई की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी।

Key Takeaways

  • सीबीआई ने नोएडा में एक ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया।
  • आरोपियों ने 8.5 मिलियन डॉलर की ठगी की।
  • छापेमारी में 1.88 करोड़ रुपए कैश और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए।
  • सीबीआई और FBI के बीच सहयोग से यह ऑपरेशन सफल हुआ।
  • आम जनता की सुरक्षा के लिए सीबीआई की कार्रवाई महत्वपूर्ण है।

नोएडा, 12 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नोएडा में एक विशाल ट्रांसनेशनल साइबर क्राइम नेटवर्क को नष्ट कर दिया है। यह नेटवर्क 2022 से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बना रहा था और उनसे बड़े पैमाने पर धन की ठगी कर रहा था। सीबीआई को इस मामले में फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) अमेरिका द्वारा जानकारी प्राप्त हुई, जिससे इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस अभियान की जानकारी शुक्रवार को प्रेस रिलीज के माध्यम से मीडिया को दी गई।

इस नेटवर्क ने वर्चुअल एसेट, जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी और विदेशी बैंक खातों का उपयोग करके साइबर क्राइम का संचालन किया। आरोपियों ने अमेरिकियों को यह धमकी दी कि उनके सोशल सिक्योरिटी नंबर (एसएसएन) का उपयोग ड्रग डिलीवरी और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है। इस डर के चलते उन्होंने लोगों से 8.5 मिलियन डॉलर की राशि ट्रांसफर करवा ली।

सीबीआई ने 9 दिसंबर को मामला दर्ज किया और तुरंत जांच आरंभ की। दिल्ली, नोएडा और कोलकाता में आरोपियों के ठिकानों और कॉल सेंटरों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इसके दौरान यह पता चला कि यह नेटवर्क अवैध कॉल सेंटर के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर-इनेबल्ड वित्तीय अपराध कर रहा था।

सीबीआई ने नोएडा में स्थित कॉल सेंटर से छह प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें शुभम सिंह (डोमिनिक), डाल्टनलियन (माइकल), जॉर्ज टी. जमलियानलाल (माइल्स), एल. सेमिनलेन हाओकिप (रॉनी), मंगखोलुन (मैक्सी), और रॉबर्ट थांगखानखुअल (डेविड/मुनरोइन) शामिल हैं।

तलाशी के दौरान 1.88 करोड़ रुपए नकद और 34 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जैसे मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव बरामद किए गए। इन उपकरणों में अपराध से संबंधित दस्तावेज और डेटा भी मिले। सीबीआई ने कहा कि आगे भी ऑपरेशन जारी रहेंगे ताकि इस अपराध से जुड़े धन और लेनदेन का पता लगाया जा सके।

सीबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और तकनीक का उपयोग कर बड़े पैमाने पर अपराध कर रहा था। सीबीआई इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों के सहयोग से इस नेटवर्क की पहचान और समाप्ति के लिए कार्य कर रही है।

सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि इस कार्रवाई से बड़े ट्रांसनेशनल साइबर-फाइनेंशियल क्राइम नेटवर्क में काफी हद तक रोकथाम हुई है। अब यह नेटवर्क पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है और ऐसे अपराधियों को कानूनी दायरे में लाने का कार्य लगातार जारी रहेगा।

सीबीआई ने यह भी बताया कि उनका उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि ऐसे नेटवर्क को समाप्त करना और आम जनता को सुरक्षित रखना भी है।

Point of View

जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है।
NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

सीबीआई ने कब इस ऑपरेशन को अंजाम दिया?
सीबीआई ने इस ऑपरेशन को 9 दिसंबर को अंजाम दिया।
आरोपियों ने कितने पैसे की ठगी की?
आरोपियों ने अमेरिका के नागरिकों से 8.5 मिलियन डॉलर की ठगी की।
कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
इस ऑपरेशन में कुल 6 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
क्या सीबीआई और FBI के बीच सहयोग था?
हाँ, इस मामले में सीबीआई को FBI से इनपुट मिला था।
कॉल सेंटर का क्या हाल है?
सीबीआई ने अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी की और इसे बंद कर दिया।
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