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नोएडा में UPPCB की बड़ी कार्रवाई: अक्टूबर में ₹75 लाख जुर्माना, आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख की संस्तुति

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नोएडा में UPPCB की बड़ी कार्रवाई: अक्टूबर में ₹75 लाख जुर्माना, आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख की संस्तुति

सारांश

नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण पर UPPCB का शिकंजा — अक्टूबर में ₹75 लाख जुर्माना, आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख की संस्तुति, और कुल ₹1.28 करोड़ की वसूली। अब बोर्ड सिर्फ आर्थिक दंड नहीं, स्पेशल कोर्ट में एफआईआर की भी तैयारी में है।

मुख्य बातें

UPPCB ने अक्टूबर 2026 में नोएडा में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर करीब ₹75 लाख जुर्माना लगाया।
आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख और ऐस इन्फ्रासिटी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड (सेक्टर-150) पर ₹10 लाख जुर्माने की संस्तुति की गई।
विभिन्न मामलों में अब तक कुल ₹1 करोड़ 28 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है।
नोएडा में 20 से अधिक आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट संचालित हैं; कई के अवैध होने की बात सामने आई है।
बोर्ड ने लगातार उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ विशेष न्यायालय में एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने नोएडा में वायु प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ अक्टूबर 2026 में अब तक करीब ₹75 लाख का जुर्माना लगाया है। प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अनदेखी करने वाली इकाइयों के विरुद्ध यह अभियान उस समय तेज हुआ है जब शहर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। बोर्ड ने कुछ कंपनियों के खिलाफ भारी जुर्माने की संस्तुति के साथ-साथ विशेष न्यायालय में एफआईआर दर्ज कराने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं।

प्रमुख कार्रवाइयाँ और जुर्माने

UPPCB की कार्रवाई के तहत नोएडा स्थित आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख के जुर्माने की संस्तुति की गई है। वहीं, सेक्टर-150 में संचालित ऐस इन्फ्रासिटी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड पर ₹10 लाख के जुर्माने की संस्तुति की गई है। नोएडा प्राधिकरण के ठेकेदारों पर भी नियमों की अनदेखी के मामले में जुर्माना लगाया गया है।

बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न मामलों में अब तक कुल करीब ₹1 करोड़ 28 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान धूल प्रबंधन, निर्माण सामग्री के उचित भंडारण और प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराना है।

आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट बने चिंता का केंद्र

बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में 20 से अधिक रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) और हॉट मिक्सचर प्लांट संचालित हैं, जिनमें से कई के अवैध रूप से चलने की बात सामने आई है। पुस्ता रोड पर स्थित इन प्लांटों को शहर में बढ़ते प्रदूषण के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।

हॉट मिक्सचर प्लांट में सड़क निर्माण के लिए सामग्री तैयार की जाती है, जबकि आरएमसी प्लांट में कंक्रीट का उत्पादन होता है। इन इकाइयों में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन न होने पर धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। बोर्ड इन प्लांटों के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों और आवश्यक अनुमतियों की जाँच कर रहा है।

कार्रवाई के बावजूद उल्लंघन जारी

यह ऐसे समय में आया है जब जुर्माने और कार्रवाई के बावजूद शहर के कई हिस्सों में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियाँ जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बोर्ड की कार्रवाई और उसके व्यावहारिक प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कथित तौर पर कई आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट धड़ल्ले से संचालित होते रहे हैं।

गौरतलब है कि आर्थिक दंड की सीमित प्रभावशीलता को देखते हुए बोर्ड अब केवल जुर्माने तक सीमित न रहकर कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम

अधिकारियों ने लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ विशेष न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने की संस्तुति की है। यह कदम नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण प्रवर्तन की रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।

नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब होने के बीच UPPCB की इस अभूतपूर्व कार्रवाई को अहम माना जा रहा है। निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और प्लांटों में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन सुनिश्चित कराना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले सप्ताहों में विशेष न्यायालय की कार्रवाई और अवैध प्लांटों पर की जाने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह अभियान वास्तव में कितना प्रभावी साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब प्लांट जुर्माना भरकर भी संचालन जारी रखें तो आर्थिक दंड की उपयोगिता कितनी है। नोएडा में प्रदूषण नियंत्रण की यह कहानी हर सर्दी से पहले दोहराई जाती है — कार्रवाइयाँ होती हैं, जुर्माने लगते हैं, फिर भी AQI खतरनाक स्तर पर पहुँचता है। स्पेशल कोर्ट में एफआईआर की संस्तुति एक सार्थक बदलाव हो सकती है, लेकिन संस्तुति और वास्तविक अभियोजन के बीच की खाई को पाटना ही असली परीक्षा होगी। अवैध प्लांटों की जाँच और उनकी अनुमतियों का सत्यापन बिना राजनीतिक दबाव के हो, तभी यह अभियान दीर्घकालिक असर छोड़ सकता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPPCB ने नोएडा में अक्टूबर 2026 में कितना जुर्माना लगाया?
UPPCB ने अक्टूबर 2026 में अब तक करीब ₹75 लाख का जुर्माना लगाया है। विभिन्न मामलों को मिलाकर कुल जुर्माने की राशि लगभग ₹1 करोड़ 28 लाख हो चुकी है।
आइवरी काउंटी पर क्या कार्रवाई की गई है?
UPPCB ने नोएडा स्थित आइवरी काउंटी पर ₹50 लाख के जुर्माने की संस्तुति की है। यह प्रदूषण नियंत्रण मानकों के उल्लंघन के कारण की गई कार्रवाई का हिस्सा है।
नोएडा में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पुस्ता रोड पर स्थित हॉट मिक्सचर प्लांट और आरएमसी प्लांट नोएडा में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से हैं। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर धूल प्रबंधन और निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन में लापरवाही भी एक बड़ा कारण है।
UPPCB आगे क्या कदम उठाने की योजना बना रहा है?
बोर्ड अब केवल आर्थिक दंड तक सीमित नहीं रहेगा — अधिकारियों ने लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ विशेष न्यायालय में एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की है। साथ ही अवैध आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांटों की जाँच और अनुमतियों का सत्यापन भी किया जा रहा है।
नोएडा में कितने आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट हैं और क्या सभी वैध हैं?
UPPCB के अधिकारियों के मुताबिक नोएडा में 20 से अधिक आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट संचालित हैं। इनमें से कई के अवैध रूप से चलने की बात सामने आई है, जिनकी जाँच और आवश्यक अनुमतियों का सत्यापन जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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