क्या न्यायपालिका में देरी से न्याय मिलना खुद में एक अन्याय है?
सारांश
Key Takeaways
- न्याय में देरी अन्याय है।
- पंजाब में हिंसा की घटनाएं चिंताजनक हैं।
- महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
- सोमनाथ मंदिर भारतीय संस्कृति का प्रतीक है।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का सम्मान करना आवश्यक है।
लखनऊ, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज की, तब समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि न्यायपालिका में न्याय मिलने में देरी अपने आप में एक अन्याय है।
रविदास मेहरोत्रा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि 24 फरवरी 2020 को सीएए कानून के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिससे सात लोग गिरफ्तार हुए और उन्हें जेल भेजा गया। सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से पांच को जमानत दी, जबकि दो की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। हम न्यायपालिका के इस महत्वपूर्ण निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन सच यह है कि इस मामले की सुनवाई अभी तक पूरी नहीं हुई है। न्यायपालिका में न्याय मिलने में किसी भी प्रकार की देरी स्वयं में एक अन्याय है, इसलिए इस सुनवाई को शीघ्रता से पूरा किया जाना चाहिए, ताकि निर्दोष व्यक्ति को बेवजह परेशान न किया जाए।
सपा नेता ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 'लव जिहाद' संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराधों पर भी चर्चा करनी चाहिए। कई नेता खुद अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक विवाह में मदद कर चुके हैं। भाजपा के नेता और संघ के लोग भी जनता के मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करें।
उन्होंने पंजाब में बढ़ती हिंसा और हत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और आरोपियों को बिना किसी देरी के गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
रविदास मेहरोत्रा ने सोमनाथ मंदिर का उल्लेख किया, जो देश के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। जब देश अंग्रेजों के कब्जे में था, तब भी उन्होंने सोमनाथ मंदिर को लूटने का प्रयास किया, लेकिन यह मंदिर लोगों के लिए आशा, आस्था और भक्ति का प्रतीक बना रहा। लेकिन भाजपा सरकार जनता के मूल मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। वे महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अपराधों के बारे में बात नहीं करना चाहतीं, बल्कि उनका लक्ष्य केवल जनता को गुमराह करना है।