ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीद जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर होंगे अंकित
सारांश
मुख्य बातें
ऑपरेशन सिंदूर में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 6 वीर जवानों के नाम अब नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) की ग्रेनाइट दीवारों पर स्थायी रूप से अंकित किए जाएंगे। स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट पर इन शहीदों के नाम सार्वजनिक कर दिए गए हैं। इन 6 शहीदों में भारतीय सेना के 5 जवान और भारतीय वायुसेना के 1 सार्जेंट शामिल हैं।
शहीद वीरों के नाम
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित होने वाले ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम इस प्रकार हैं — सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार, लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर मूड मुरली नाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह (सभी भारतीय सेना) और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायुसेना)। ये नाम उन सभी सैनिकों की सूची के साथ दर्ज किए गए हैं जिन्होंने वर्ष 2025 में विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए।
वीरता पुरस्कार से सम्मान
इन 6 शहीदों में से दो को उनकी असाधारण वीरता के लिए सैन्य सम्मान से नवाज़ा गया है। राइफलमैन सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया — जो भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। वे ऑपरेशन के दौरान नियंत्रण रेखा पर तैनात थे और कर्तव्य पालन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। 8 जून को आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे शहीद के माता-पिता सुदेश कुमारी और यश पाल ने ग्रहण किया। वहीं भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को मरणोपरांत वायु पदक से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र'
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का 'त्याग चक्र' देश के उन शहीदों को समर्पित है जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद विभिन्न सैन्य अभियानों में सर्वोच्च बलिदान दिया। इसमें ग्रेनाइट की 16 वृत्ताकार दीवारें हैं, जिनकी प्रत्येक ईंट पर शहीद सैनिक का नाम, पद और यूनिट अंकित होती है। ऑपरेशन सिंदूर के इन 6 वीर सपूतों के नाम अब इसी गौरवशाली संरचना का स्थायी हिस्सा बनेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में छिपे आतंकवादियों के विरुद्ध चलाया गया था। इस अभियान को सफल बताया गया, परंतु इसकी कीमत देश ने अपने 6 वीर सैनिकों के बलिदान के रूप में चुकाई। इन शहीदों का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में सदा के लिए अंकित हो जाएगा, और उनकी वीरगाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।