क्या पाकिस्तान को हमारे आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
- कर्नाटक सरकार को बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
- केरल की सरकार को अपनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
- राजनीतिक खींचतान से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- इतिहास गवाह है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने केरल पर आक्रमण किया।
बेंगलुरु, 30 दिसंबर (राष्ट्रीय प्रेस)। राम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद मुतालिक ने पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा कि उसे हमारे आंतरिक मामलों पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी राष्ट्रीय प्रेस से बातचीत में कहा कि हम उस पाकिस्तान से सुझाव लेने की सोच भी नहीं सकते, जो पिछले कई दशकों से आर्थिक संकट में है। मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि पाकिस्तान एक भिखारी देश बन चुका है, जिसके पास खुद का कुछ नहीं है। उसकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है, और पूरी दुनिया में उसकी कोई पूछ नहीं है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को किसी भी विषय पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक हक नहीं है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री द्वारा कर्नाटक सरकार की बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल उठाने को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार अपने राज्य के संबंध में हर प्रकार के निर्णय लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र और सक्षम है। उसे बाहरी हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इसलिए, मेरा सुझाव है कि केरल की सरकार अपने राज्य की समस्याओं पर ध्यान दें, न कि कर्नाटक की स्थिति पर। केरल में वर्तमान में कई समस्याएं हैं, और यदि केरल सरकार उन पर ध्यान देगी, तो यह उनके लिए लाभकारी रहेगा।
राम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किस प्रकार मुस्लिम आक्रांताओं ने केरल पर आक्रमण किया और उसकी संस्कृति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। ऐसे में मेरा सुझाव है कि केरल की सरकार हमारे देश के मामलों में हस्तक्षेप न करें। कर्नाटक में सब कुछ ठीक है।
इसके अलावा, उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच चल रही राजनीति को गलत बताते हुए कहा कि इससे जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। राज्य में विकास से संबंधित सभी कार्य ठप हो गए हैं और यह सब इन दोनों के बीच की राजनीतिक खींचतान का नतीजा है। अब इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेंगे।