नागपट्टिनम ड्रग्स जब्ती: ₹400 करोड़ के मेथ मामले में पलानीस्वामी ने CM विजय से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की माँग की है। यह माँग नागपट्टिनम जिले में हुई ₹400 करोड़ की ड्रग्स जब्ती के सिलसिले में सत्ताधारी दल तमिल वेट्री कझगम (TVK) के एक कथित पदाधिकारी की संलिप्तता को लेकर की गई है। विपक्ष के नेता ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री की चुप्पी उनके नशा-विरोधी अभियानों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
जब्ती का विवरण
पलानीस्वामी के बयान के अनुसार, बूबलन नामक व्यक्ति के पास से 137 किलोग्राम प्रोसेस्ड मेथामफेटामाइन क्रिस्टल बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹400 करोड़ आँकी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए पलानीस्वामी ने दावा किया कि यह हाल के वर्षों में तमिलनाडु के तटीय इलाकों में पकड़ी गई ड्रग्स की सबसे बड़ी खेपों में से एक है। उन्होंने यह भी कथित तौर पर दावा किया कि बूबलन नागपट्टिनम जिले में TVK का पदाधिकारी है।
विपक्ष का राजनीतिक आरोप
पलानीस्वामी ने पूछा कि अपनी पार्टी से जुड़े एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप उठने के बावजूद मुख्यमंत्री विजय मौन क्यों हैं। उन्होंने माँग की कि मुख्यमंत्री इस जब्ती और बूबलन के TVK से कथित संबंध — दोनों मसलों पर अपना रुख स्पष्ट करें। गौरतलब है कि बयान में TVK या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है, और बूबलन के विरुद्ध लगाए गए आरोप पूरी तरह पलानीस्वामी के बयानों पर आधारित हैं।
पूर्व डीएमके मामले का संदर्भ
अपने हमले को ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए एआईएडीएमके नेता ने पूर्व द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) पदाधिकारी जाफर सादिक के मामले का उल्लेख किया, जिन्हें केंद्रीय एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस मामले में स्यूडोएफेड्रिन — मेथामफेटामाइन निर्माण में प्रयुक्त एक रसायन — शामिल था। पलानीस्वामी ने यह सादृश्य प्रस्तुत कर सत्ताधारी दलों पर यह आरोप लगाया कि जब उनके अपने लोगों पर नशे की तस्करी के आरोप लगते हैं, तब उनका आचरण संदिग्ध रहता है।
नशा-विरोधी अभियान पर सवाल
पलानीस्वामी ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री विजय द्वारा आयोजित एक नशा-विरोधी मैराथन का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब सत्ताधारी पार्टी का ही एक पदाधिकारी इतने बड़े पैमाने के नशे के मामले में कथित रूप से जुड़ा हो, तब सरकार ऐसे जागरूकता अभियानों को कैसे विश्वसनीय ठहरा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की सार्वजनिक नशा-विरोधी छवि और उसके अपने दल के सदस्यों से जुड़े आरोपों के बीच का अंतर अस्वीकार्य है।
आगे की स्थिति
नागपट्टिनम की इस जब्ती ने तमिलनाडु में विपक्षी राजनीति का नया केंद्र बिंदु बना लिया है। पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री विजय से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की माँग दोहराई है। यह देखना होगा कि TVK और राज्य सरकार इस मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं, और जाँच एजेंसियाँ बूबलन की पार्टी से कथित संलिप्तता को किस रूप में आगे बढ़ाती हैं।