परगट सिंह ने संभाला पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष का पदभार, बोले — 'राजनीति दिशाहीन, सबको एक मंच पर लाऊंगा'
सारांश
मुख्य बातें
नवनियुक्त पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने 11 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय पहुँचकर औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की राजनीति दिशाहीन होती जा रही है और उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता सभी कांग्रेस नेताओं को एकजुट कर एक साझा मंच पर लाना होगी।
नवरात्रि के मौके पर पहला बयान
नवरात्रि के शुभ अवसर पर परगट सिंह ने कहा, 'सबसे पहले मैं नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं, यह बहुत शुभ अवसर है। इसके साथ ही हम पंजाब में रचनात्मक राजनीति की दिशा में काम करेंगे क्योंकि राज्य की राजनीति दिशाहीन होती जा रही है।' यह उनका पद संभालते ही पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसमें उन्होंने पार्टी की आंतरिक एकता को सर्वोच्च एजेंडा बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर परगट सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, 'यह लोकतंत्र नहीं है, देश में तानाशाही चल रही है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है।
भगवंत मान के बयान पर पलटवार
गौरतलब है कि 4 अक्टूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि पंजाब कांग्रेस में कार्यकर्ता कम हैं और मुख्यमंत्री पद के दावेदार ज्यादा हैं। इस पर परगट सिंह ने जवाब दिया था, 'भगवंत मान को तर्क के साथ बात करनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस की एक मज़बूत टीम आगे बढ़ेगी और पंजाब को बेहतर स्थिति में लाएगी।
व्यक्तिगत संबंधों को लेकर परगट सिंह ने कहा था, 'भगवंत मान को मैं जानता हूं और वह मुझे जानते हैं। एक कलाकार के तौर पर मैं उनका सम्मान करता हूं और एक खिलाड़ी के तौर पर वे मेरा सम्मान करते हैं। हालांकि पिछले पौने पाँच सालों में आपने जो किया है, लोग उसके लिए जवाबदेही की मांग करेंगे।' यह बयान आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के शासन-काल पर सीधा निशाना था।
सीएम चेहरे के सवाल पर सधा हुआ जवाब
पंजाब कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर परगट सिंह ने स्पष्ट किया कि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा था कि जो चुने हुए प्रतिनिधि होंगे, वे विधायक दल (CLP) का चयन करेंगे और यह प्रक्रिया पार्टी हाईकमान के साथ बातचीत और चर्चा के बाद स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ेगी। यह रुख दर्शाता है कि परगट सिंह फिलहाल किसी एक नाम पर दांव लगाने से बच रहे हैं।
आगे की राह
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी की दृष्टि से परगट सिंह के सामने पार्टी में बिखराव को थामना सबसे बड़ी चुनौती है। AAP सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता बनाना और कांग्रेस के गुटबाजी के इतिहास पर काबू पाना उनकी प्राथमिक ज़िम्मेदारी होगी। नए अध्यक्ष के रूप में उनकी पहली असली परीक्षा पंजाब में ज़मीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जीवित करने की क्षमता से तय होगी।