क्या पटना पुलिस ने म्यांमार में बंधक बनाए गए इंजीनियर को भारतीय दूतावास की मदद से बचाया?

सारांश
Key Takeaways
- सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापनों पर भरोसा न करें।
- सुरक्षा और जागरूकता प्राथमिकता होनी चाहिए।
- म्यांमार में बंधक बनाए गए सचिन का मामला गंभीर है।
- पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की।
- फिरौती का भुगतान करना खतरनाक हो सकता है।
पटना, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। पटना पुलिस ने म्यांमार में बंधक बनाए गए इंजीनियर सचिन को भारतीय दूतावास और बिहार पुलिस मुख्यालय की मदद से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है।
इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सीतामढ़ी निवासी सुनील कुमार को गिरफ्तार किया है। पीड़ित के परिजनों ने सुनील के बैंक खाते में 1.5 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे।
पटना पश्चिम के एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि नेपाल निवासी धर्मेंद्र ने इंस्टाग्राम पर एक विज्ञापन के जरिए सचिन से संपर्क किया था। धर्मेंद्र ने सचिन को 12 लाख रुपए सालाना पैकेज की नौकरी का लालच दिया। इसके बाद सचिन को कोलकाता होते हुए हवाई मार्ग से पहले थाईलैंड और फिर म्यांमार भेजा गया।
एसपी भानु प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि म्यांमार में एक अपराधी गिरोह ने सचिन को बंधक बना लिया और उसे ऑनलाइन स्कैम संचालन के लिए मजबूर किया।
जब सचिन ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, सचिन के परिजनों से फोन पर फिरौती भी मांगी गई। सचिन को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
इस गिरोह में चीन के नागरिकों समेत कई संदिग्ध शामिल थे, जो सचिन के परिवार से डॉलर में फिरौती मांग रहे थे और न देने पर उसके अंग बेचने की धमकी दे रहे थे। सचिन के परिजनों ने डर के कारण 1.5 लाख रुपए का भुगतान भी किया।
एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी सुनील कुमार ने कई अहम खुलासे किए हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय ठगी और अपहरण रैकेट के अन्य सदस्यों की पहचान की है।
मुख्य आरोपी धर्मेंद्र अभी फरार है और उसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर नौकरी के विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी ऑफर की सत्यता की जांच करें।