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पीआईबी फैक्ट चेक: गृह मंत्रालय अधिकारियों के राहुल-प्रियंका से संपर्क का दावा भ्रामक

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पीआईबी फैक्ट चेक: गृह मंत्रालय अधिकारियों के राहुल-प्रियंका से संपर्क का दावा भ्रामक

सारांश

पीआईबी ने सोशल मीडिया पर वायरल उस दावे को भ्रामक करार दिया जिसमें कहा गया था कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राहुल-प्रियंका से संपर्क किया। इसी दिन 300 विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च किया, जहाँ प्रवेश रोके जाने पर वे आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठ गए।

मुख्य बातें

पीआईबी ने 6 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक फैक्ट चेक जारी कर गृह मंत्रालय अधिकारियों के राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संपर्क के दावे को भ्रामक बताया।
लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन तक एक किलोमीटर का मार्च किया।
सुरक्षाकर्मियों ने सांसदों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने से रोका; विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विरोध-प्रदर्शन को 'शर्मनाक' बताते हुए कड़ी निंदा की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी चुनाव रद्द कर बैलेट पेपर से दोबारा मतदान की माँग की, जिसकी भाजपा ने आलोचना की।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक फैक्ट चेक जारी कर सोशल मीडिया पर वायरल उन दावों को भ्रामक करार दिया, जिनमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी से निर्वाचन सदन के बाहर बने गतिरोध को समाप्त करने के लिए संपर्क किया था। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन कार्यरत यह सरकारी एजेंसी इन दावों को पूरी तरह निराधार बताती है।

क्या था भ्रामक दावा

पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक के साथ एक 'पत्रकार' और एक न्यूज़ चैनल की वेबसाइट के सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भ्रामक दावों और अपुष्ट जानकारी के बहकावे में न आएं। केवल सत्यापित और विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।' ये दावे उस दिन के विरोध-प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में फैलाए गए थे।

मुख्य घटनाक्रम: संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च

इससे पहले उसी दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकसभा और राज्यसभा के करीब 300 विपक्षी सांसद — जिनमें बीजद के सांसद भी शामिल थे — संसद से निर्वाचन सदन तक करीब एक किलोमीटर का मार्च करते हुए पहुँचे। इनका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करना था। हालाँकि, सुरक्षाकर्मियों ने सांसदों को आयोग के दफ्तर में प्रवेश करने से रोक दिया।

आयोग के दफ्तर से करीब 50 गज की दूरी पर रोके जाने के बाद गांधी ने पत्रकारों से कहा, 'हम सीईसी और चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन हमें रोक दिया गया और वहाँ जाने से मना कर दिया गया।' इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता ईसीआई दफ्तर के पास स्थित आकाशवाणी भवन के अंदर धरने पर बैठ गए।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने हाई-सिक्योरिटी जोन में हुए इस विरोध-प्रदर्शन की कड़ी निंदा करते हुए कहा, 'दिल्ली में बैठकर उन्होंने यहाँ एक संवेदनशील इलाके को घेर लिया है और कह रहे हैं कि (सीईसी) ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और (गृह मंत्री) अमित शाह के चंगुल में हैं। यह शर्मनाक है। मैं इसकी निंदा करता हूँ।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विपक्षी पार्टियाँ अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।

प्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उस माँग पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने सभी चुनाव रद्द कर बैलेट पेपर से दोबारा मतदान कराने की बात कही थी। प्रसाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर दबाव डालकर परिणामों को प्रभावित करना चाहता है।

गौरतलब संदर्भ

यह ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच खींचतान तेज़ है। गौरतलब है कि इससे पहले भी ऐसे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर कई अपुष्ट दावे वायरल होते रहे हैं, जिन्हें पीआईबी समय-समय पर खारिज करता रहा है। यह इस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी है।

आगे क्या

पीआईबी के इस फैक्ट चेक के बाद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और नागरिकों को स्रोत सत्यापन की ओर प्रेरित किया जा रहा है। यह देखना अहम होगा कि क्या विपक्ष इस मुद्दे पर संसद के भीतर या न्यायिक मार्ग से आगे बढ़ता है, और क्या चुनाव आयोग विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मिलने का समय देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्य सवाल यह बचता है कि इतने बड़े विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने से क्यों रोका गया — इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी नहीं आया।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीआईबी फैक्ट चेक में क्या भ्रामक बताया गया?
पीआईबी ने उन सोशल मीडिया दावों को भ्रामक करार दिया जिनमें कहा गया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से निर्वाचन सदन के बाहर बने गतिरोध को समाप्त करने के लिए संपर्क किया। एजेंसी ने एक 'पत्रकार' और न्यूज़ चैनल की पोस्ट के स्क्रीनशॉट के साथ यह स्पष्टीकरण जारी किया।
विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन तक मार्च क्यों किया?
राहुल गांधी के नेतृत्व में करीब 300 विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने के लिए संसद से निर्वाचन सदन तक पहुँचे। हालाँकि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें प्रवेश से रोक दिया, जिसके बाद वे आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठ गए।
भाजपा ने इस प्रदर्शन पर क्या कहा?
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विरोध को 'शर्मनाक' बताते हुए इसकी निंदा की और पूछा कि क्या विपक्ष अराजकता फैलाना चाहता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को दबाव में लाकर परिणाम प्रभावित करना चाहता है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने क्या माँग की?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभी चुनाव रद्द करने और बैलेट पेपर का इस्तेमाल करके दोबारा चुनाव कराने की माँग की। भाजपा ने इस माँग को निराधार और लोकतंत्र-विरोधी करार दिया।
पीआईबी फैक्ट चेक किस मंत्रालय के अधीन काम करता है?
पीआईबी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन सरकारी सूचना एजेंसी है, जो सरकार से जुड़े भ्रामक और फर्जी दावों की जाँच कर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करती है।
राष्ट्र प्रेस
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