संसद में विपक्ष का मार्च: गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक, गृह मंत्री से जवाब की माँग
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी गठबंधन के अन्य सांसदों ने बुधवार, 5 अगस्त को संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। यह प्रदर्शन 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कथित पुलिस बल-प्रयोग, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। विपक्ष ने एकजुट होकर माँग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर इन मामलों पर विस्तृत बयान दें।
मार्च की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार इन मुद्दों पर सदन में चर्चा की माँग करता रहा है। 20 जुलाई को हुई कथित पुलिस कार्रवाई — जिसमें लाठीचार्ज, पैलेट गन का उपयोग और आँसू गैस के प्रयोग के आरोप हैं — को लेकर विपक्ष का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों को सार्वजनिक जवाबदेही देनी चाहिए। यह मार्च महात्मा गांधी की प्रतिमा से इसलिए शुरू किया गया ताकि सरकार को गांधीवादी लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाई जा सके।
प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पत्रकारों से कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है। उन्होंने कहा, 'यदि बच्चों पर गोलियाँ चलाई गईं, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, आँसू गैस छोड़ी गई या लाठीचार्ज किया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों को जवाब देना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 'यह लोकतंत्र है, किसी का शाही दरबार नहीं।'
खड़गे का सरकार पर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा का मंच है और किसी भी मुद्दे का समाधान संवाद से ही निकल सकता है। खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें 'राम विरोधी' और 'राष्ट्र विरोधी' बताने की कोशिश कर रही है।
राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर खड़गे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष भगवान राम का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि यह जानना चाहता है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे, सोने-चाँदी और अन्य चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़ी कथित भूमि अनियमितताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की माँग को राष्ट्र-विरोधी करार देना उचित नहीं है।
अन्य सांसदों की आवाज़
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि हाल की घटनाओं में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि लाठीचार्ज क्यों किया गया, नुकीली लाठियों का इस्तेमाल क्यों हुआ और पैलेट गन क्यों चलाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितताओं के सवाल निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही उठते रहे हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को गंभीर मुद्दा बताते हुए माँग की कि गृह मंत्री संसद में आकर पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। उन्होंने यह भी कहा कि इंडी अलायंस लगातार केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने की माँग कर रहा है और सरकार को इसमें हो रही देरी का कारण स्पष्ट करना चाहिए।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष की माँग है कि सदन में इन मुद्दों पर नियमित चर्चा हो और जवाबदेही तय की जाए। यदि सरकार गृह मंत्री का बयान देने से इनकार करती है, तो विपक्ष और अधिक आक्रामक संसदीय रणनीति अपनाने का संकेत दे चुका है।