5 अगस्त 2026
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संसद में विपक्ष का मार्च: गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक, गृह मंत्री से जवाब की माँग

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संसद में विपक्ष का मार्च: गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक, गृह मंत्री से जवाब की माँग

सारांश

मानसून सत्र में विपक्ष ने संसद परिसर में गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकालकर सरकार को सीधी चुनौती दी — 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावे में हेराफेरी और जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर गृह मंत्री से संसद में जवाब माँगा।

मुख्य बातें

राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी सांसदों ने 5 अगस्त को संसद परिसर में गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला।
विरोध के मुख्य मुद्दे: 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताएँ और जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
खड़गे ने किरेन रिजिजू पर आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को 'राम विरोधी' बताकर जवाबदेही से बच रही है।
विपक्ष ने माँग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर इन मुद्दों पर विस्तृत बयान दें।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्षी गठबंधन के अन्य सांसदों ने बुधवार, 5 अगस्त को संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकाला। यह प्रदर्शन 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कथित पुलिस बल-प्रयोग, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी और जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली जैसे मुद्दों पर केंद्रित था। विपक्ष ने एकजुट होकर माँग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर इन मामलों पर विस्तृत बयान दें।

मार्च की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें

मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार इन मुद्दों पर सदन में चर्चा की माँग करता रहा है। 20 जुलाई को हुई कथित पुलिस कार्रवाई — जिसमें लाठीचार्ज, पैलेट गन का उपयोग और आँसू गैस के प्रयोग के आरोप हैं — को लेकर विपक्ष का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों को सार्वजनिक जवाबदेही देनी चाहिए। यह मार्च महात्मा गांधी की प्रतिमा से इसलिए शुरू किया गया ताकि सरकार को गांधीवादी लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाई जा सके।

प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने पत्रकारों से कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों की जनता के प्रति जवाबदेही होती है। उन्होंने कहा, 'यदि बच्चों पर गोलियाँ चलाई गईं, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ, आँसू गैस छोड़ी गई या लाठीचार्ज किया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्णय लेने वालों को जवाब देना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 'यह लोकतंत्र है, किसी का शाही दरबार नहीं।'

खड़गे का सरकार पर आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर विपक्ष की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा का मंच है और किसी भी मुद्दे का समाधान संवाद से ही निकल सकता है। खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें 'राम विरोधी' और 'राष्ट्र विरोधी' बताने की कोशिश कर रही है।

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद पर खड़गे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष भगवान राम का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि यह जानना चाहता है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे, सोने-चाँदी और अन्य चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़ी कथित भूमि अनियमितताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच की माँग को राष्ट्र-विरोधी करार देना उचित नहीं है।

अन्य सांसदों की आवाज़

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि हाल की घटनाओं में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि लाठीचार्ज क्यों किया गया, नुकीली लाठियों का इस्तेमाल क्यों हुआ और पैलेट गन क्यों चलाए गए। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितताओं के सवाल निर्माण कार्य शुरू होने के समय से ही उठते रहे हैं।

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को गंभीर मुद्दा बताते हुए माँग की कि गृह मंत्री संसद में आकर पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। उन्होंने यह भी कहा कि इंडी अलायंस लगातार केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल करने की माँग कर रहा है और सरकार को इसमें हो रही देरी का कारण स्पष्ट करना चाहिए।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष की माँग है कि सदन में इन मुद्दों पर नियमित चर्चा हो और जवाबदेही तय की जाए। यदि सरकार गृह मंत्री का बयान देने से इनकार करती है, तो विपक्ष और अधिक आक्रामक संसदीय रणनीति अपनाने का संकेत दे चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इन मुद्दों पर सदन के भीतर सार्थक चर्चा करा पाएगा। 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई के आरोप गंभीर हैं और इन पर स्वतंत्र जाँच की माँग तर्कसंगत है, लेकिन विपक्ष का राम मंदिर के चढ़ावे का मुद्दा उठाना सरकार को उसे धार्मिक आस्था बनाम जवाबदेही के रूप में पेश करने का अवसर देता है। मानसून सत्र में बार-बार व्यवधान से यह जोखिम है कि मुद्दे की गंभीरता राजनीतिक शोर में दब जाए — जबकि जरूरत एक संरचित संसदीय बहस की है जो तथ्यों पर टिकी हो।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विपक्षी सांसदों ने संसद में मार्च क्यों निकाला?
विपक्षी सांसदों ने 5 अगस्त को 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई, अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे की बहाली जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब माँगने के लिए यह मार्च निकाला। उनकी प्रमुख माँग है कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर बयान दें।
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई का मामला क्या है?
विपक्ष का आरोप है कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों — जिनमें छात्र भी शामिल थे — पर लाठीचार्ज, पैलेट गन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया। ये आरोप अभी कथित तौर पर हैं और सरकार ने इन पर अपना पक्ष संसद में नहीं रखा है।
राम मंदिर चढ़ावे को लेकर विपक्ष की क्या माँग है?
विपक्ष यह जानना चाहता है कि अयोध्या राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे, सोने-चाँदी और अन्य चढ़ावे का उपयोग किस प्रकार हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने ट्रस्ट से जुड़ी कथित भूमि अनियमितताओं का भी उल्लेख किया है और पारदर्शी जाँच की माँग की है।
जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर विपक्ष का क्या रुख है?
इंडी अलायंस लगातार केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा बहाल करने की माँग कर रहा है। सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे वहाँ के लोगों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया और सरकार से देरी का कारण स्पष्ट करने को कहा।
कांग्रेस ने किरेन रिजिजू पर क्या आरोप लगाया?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पर आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें 'राम विरोधी' और 'राष्ट्र विरोधी' करार दे रही है। खड़गे ने इसे संसद और लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान बताया।
राष्ट्र प्रेस
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