पिंक पास विवाद: AAP के सौरभ भारद्वाज का आरोप — महिलाएं घंटों कतार में, पास नहीं बन रहे
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिंक पास को अनिवार्य किए जाने के बाद महिलाओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है और दिनभर प्रतीक्षा के बाद भी बड़ी संख्या में महिलाओं के पास नहीं बन पा रहे। उनका दावा है कि दिल्ली की बसों में महिलाओं को पहले बिना किसी विशेष पास के मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती थी, जिसे अब जटिल बना दिया गया है।
मुख्य आरोप और दावे
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने पहले से सुलभ सुविधाओं को भी जटिल बनाकर आम जनता को परेशान करने की आदत डाल ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने हर आसान और पहले से जारी सेवा के लिए लोगों को कतारों में खड़ा कर दिया है। भारद्वाज ने नोटबंदी, SIR (विशेष पहचान रजिस्ट्री), पिंक पास और LPG सिलेंडर से जुड़ी परेशानियों का उल्लेख करते हुए इन्हें एक ही सिलसिले की कड़ी बताया।
उनका आरोप है कि सरकार की मंशा लोगों को इतना उलझाए रखना है कि वे नई सुविधाओं की माँग ही न कर पाएँ और रोज़मर्रा की समस्याओं में व्यस्त रहें।
मतदाता सूची और वंचित महिलाओं का मुद्दा
भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में महिलाओं के वोट काटे गए हैं और ऐसे में उन्हें पिंक पास की सुविधा से भी वंचित किया जा रहा है। जिन महिलाओं को पास मिलने की उम्मीद है, उन्हें भी इसे बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है — यह दोहरी परेशानी का मामला बनता जा रहा है।
पड़ोसी राज्यों की महिलाओं पर असर
AAP नेता ने दिल्ली में काम करने या पढ़ने आने वाली दूसरे राज्यों की महिलाओं के बारे में भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत से दिल्ली में रोज़गार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने वाली महिलाओं के साथ 'सौतेला व्यवहार' किया जा रहा है।
गौरतलब है कि दिल्ली एक आर्थिक केंद्र है जहाँ लाखों महिलाएं पड़ोसी शहरों से प्रतिदिन आती-जाती हैं। मुफ्त बस यात्रा की किसी भी नई या बदली हुई व्यवस्था का असर इन महिलाओं पर सीधा पड़ता है।
AAP की माँग
आम आदमी पार्टी ने सरकार से पिंक पास प्रक्रिया को सरल बनाने और महिलाओं की परेशानियों को तत्काल दूर करने की माँग की है। पार्टी का तर्क है कि पहले से उपलब्ध मुफ्त सुविधा को और सुलभ बनाए रखने के बजाय सरकार ने नई अनिवार्यता थोपकर महिलाओं के सामने अनावश्यक बाधाएँ खड़ी की हैं।
आगे क्या होगा
यह मुद्दा दिल्ली की राजनीति में महिला मतदाताओं और सार्वजनिक परिवहन नीति दोनों के लिहाज़ से अहम है। आलोचकों का कहना है कि पिंक पास की अनिवार्यता पर स्पष्ट क्रियान्वयन दिशानिर्देशों का अभाव इस विवाद की जड़ में है। दिल्ली सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।