PM मोदी के जन्मदिवस पर वडनगर से वाराणसी तक बाइक रैली, सूरत के 25 युवा रवाना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को पड़ने वाले जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उनकी जन्मभूमि वडनगर (गुजरात) से कर्मभूमि वाराणसी तक एक विशेष बाइक रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस सांस्कृतिक-सामाजिक अभियान की शुरुआत करते हुए 16 सितंबर 2024 को सूरत शहर से 25 युवाओं का एक दल वडनगर के लिए रवाना हुआ।
यात्रा का मार्ग और धार्मिक महत्त्व
सूरत से निकला यह दल सबसे पहले उनाई माता मंदिर परिसर में रुककर पवित्र तापी नदी का जल एकत्र करेगा। यह जल वडनगर स्थित ऐतिहासिक हाटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके पश्चात गुजरात के विभिन्न शहरों से जुटे कुल 250 युवाओं का एक विशाल काफिला शर्मिष्ठा तालाब — जो प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान के निकट स्थित ऐतिहासिक जलाशय है — से जल लेकर वाराणसी के लिए प्रस्थान करेगा।
यात्रा का समापन वाराणसी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक के साथ होगा, जो धार्मिक और प्रतीकात्मक दृष्टि से इस पूरे अभियान का केंद्रबिंदु है।
यात्रा की अवधि और सामाजिक उद्देश्य
यह बाइक रैली लगभग 15 से 17 दिनों तक चलेगी। इस दौरान युवा प्रतिभागी मार्ग में पड़ने वाले गाँवों और शहरों में रुककर स्थानीय निवासियों से संवाद करेंगे। अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों तथा प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों के बारे में जन-जागरूकता फैलाना बताया गया है।
भाजपा नेता की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सूरत शहर इकाई के अध्यक्ष परेश पटेल ने कहा, 'ये रैली एक ऐतिहासिक रैली है जो वडनगर से विसनगर के लिए जाएगी। सूरत की टीम उनाई से निकलेगी। यहां से ये सब लोग उनाई जाएंगे और वहां से 25 युवा अपनी बाइक के साथ वडनगर पहुंचेंगे और वहां से फिर उनका वाराणसी का प्रवास शुरू होगा। करीबन 15-17 दिन का ये पूरा प्रवास है। जहां-जहां वो जाएंगे वहां-वहां सेवा कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री के 25 साल सेवा कार्य के 7 अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। उससे पहले 17 सितंबर को उनका जन्मदिन है।'
प्रतिभागियों की भावना
रैली में शामिल युवा प्रतिभागी विपिन तलाविया ने कहा कि वे सूरत से वडनगर होते हुए वाराणसी तक जाएंगे और प्रधानमंत्री मोदी की दीर्घायु की कामना करेंगे। यह अभियान मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक सेवाकाल को रेखांकित करने के व्यापक आयोजनों का हिस्सा है, जिसकी परिणति 7 अक्टूबर को होगी।
यह यात्रा जन्मभूमि से कर्मभूमि तक के प्रतीकात्मक संदेश के साथ आगे बढ़ेगी — और अगले कुछ हफ्तों में मार्ग के सैकड़ों गाँवों में इसकी गूँज सुनाई देगी।