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क्या 21वीं सदी भारत और आसीयान की सदी है? शिखर सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री मोदी

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क्या 21वीं सदी भारत और आसीयान की सदी है? शिखर सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री मोदी

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'आसियान-भारत' शिखर सम्मेलन में 21वीं सदी को भारत और आसियान की सदी बताया। उन्होंने आसियान की अध्यक्षता के लिए मलेशिया के प्रधानमंत्री को बधाई दी और भारत-आसियान संबंधों के महत्व पर जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मुख्य बातें।

मुख्य बातें

आसियान-भारत की साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है।
भारत ने हर आपदा में अपने आसियान मित्रों का साथ दिया है।
तिमोर-लेस्ते आसियान का 11वां सदस्य बना है।
2026 को ‘आसियान-इंडिया समुद्री सहयोग का वर्ष’ घोषित किया गया।

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मलेशिया में आयोजित ‘आसियान-भारत’ शिखर सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी भारत और आसियान की सदी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और आसियान मिलकर विश्व की लगभग एक चौथाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, "हम सिर्फ जियोग्राफी ही शेयर नहीं करते, हम गहरे ऐतिहासिक संबंधों और साझे मूल्यों की डोर से भी जुड़े हुए हैं। हम ग्लोबल साउथ के सहयात्री हैं। हम सिर्फ व्यापारिक नहीं, सांस्कृतिक साझेदार भी हैं।"

उन्होंने कहा कि आसियान भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का मुख्य स्तंभ है। भारत हमेशा आसियान सेंट्रलिटी और इंडो पैसिफिक पर आसियान के आउटलुक का पूर्ण समर्थन करता रहा है।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि अनिश्चितताओं के इस दौर में भी भारत–आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी में सतत प्रगति हुई है। हमारी ये मजबूत साझेदारी वैश्विक स्थिरता और विकास का सशक्त आधार बनकर उभर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हर आपदा में अपने आसियान मित्रों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। मानवीय सहायता और आपदा राहत, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी में हमारा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखते हुए, हम 2026 को ‘आसियान-इंडिया समुद्री सहयोग का वर्ष’ घोषित कर रहे हैं।

'आसियान-भारत' शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने भारत के कंट्री कोऑर्डिनेटर की भूमिका कुशलता से निभाने पर फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस का धन्यवाद किया।

उन्होंने आसियान के नए सदस्य के रूप में तिमोर-लेस्ते का भी स्वागत किया। बता दें कि दक्षिण पूर्व एशियाई देश तिमोर-लेस्ते इस संगठन का 11वां सदस्य बना है। आसियान के अन्य सदस्यों में मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, इंडोनेशिया, फिलीपींस, ब्रुनेई और म्यांमार शामिल हैं।

इस दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड की क्वीन मदर सिरीकित के निधन पर सभी भारतवासियों की तरफ से थाईलैंड के राज परिवार और वहां की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह मानता हूं कि भारत और आसियान के बीच की यह साझेदारी न केवल आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत की सक्रिय भूमिका और आसियान के सहयोग से, हम एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 को 'आसियान-इंडिया समुद्री सहयोग का वर्ष' क्यों घोषित किया गया?
यह सहयोग समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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