PM मोदी से मिलीं अकी आबे, बोलीं — 'आँसू रोक नहीं पाई'; वाराणसी में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मुलाकात की। इस भावपूर्ण भेंट में अकी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी से मिलते समय वह अपने आँसू नहीं रोक पाईं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब एक दिन पहले वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' का अनावरण किया गया था।
मुलाकात का विवरण
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मिलकर खुशी हुई। भारत के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव की मैं बहुत कद्र करता हूँ।' उन्होंने यह भी कहा कि आबे-सान एक करीबी दोस्त और दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने भारत-जापान संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई।
अकी आबे ने इस मुलाकात को गहरे भावों के साथ याद करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान जो अपनापन महसूस हुआ, उसने मेरी आँखें भिगो दीं। आँसू बहने लगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह भारत और जापान के संबंधों को और मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहती हैं, और उनका विश्वास है कि उनके पति उस पल में निश्चित रूप से उनके साथ मौजूद रहे होंगे।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर का उद्घाटन
बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अकी आबे की उपस्थिति में रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 'आबे मेमोरियल कॉरिडोर' का अनावरण किया। मुख्यमंत्री योगी ने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतवासियों की ओर से शिंजो आबे को विनम्र श्रद्धांजलि बताया।
गौरतलब है कि शिंजो आबे ने 2015 में भारत दौरे के दौरान काशी की यात्रा की थी और प्रधानमंत्री मोदी के साथ गंगा आरती में भाग लिया था। उस दौरे पर उन्होंने जापान की ओर से काशी को रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की भेंट दी थी। अब उनके निधन के बाद, यह मेमोरियल कॉरिडोर उनकी स्मृतियों को सदा के लिए संरक्षित रखेगा।
भारत-जापान संबंधों में आबे की विरासत
शिंजो आबे को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी के सबसे बड़े प्रवर्तकों में से एक माना जाता है। उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' के स्तर तक पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी और आबे के व्यक्तिगत संबंध भी असाधारण रूप से घनिष्ठ रहे, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक निकटता का प्रतीक बने।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और जापान इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं। आबे की विरासत को जीवित रखने के ये प्रयास दोनों देशों के बीच जनता-से-जनता के संबंधों को भी नई ऊर्जा देते हैं।
आगे क्या
अकी आबे ने भारत-जापान संबंधों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। वाराणसी में स्थापित यह मेमोरियल कॉरिडोर आने वाले समय में दोनों देशों के नागरिकों और राजनयिकों के लिए एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संगम-स्थल बनने की उम्मीद है।