पुणे में शराब के पैसों को लेकर विवाद, 32 वर्षीय बेटे ने मां की चाकू मारकर हत्या की; गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पुणे के विश्रांतवाड़ी इलाके में शराब खरीदने के लिए पैसे मांगने को लेकर हुए विवाद के बाद 32 वर्षीय सागर सुरेश हरिभक्त ने अपनी 50 वर्षीय मां सविता सुरेश हरिभक्त की चाकू मारकर हत्या कर दी। विश्रांतवाड़ी पुलिस ने आरोपी को घटना के बाद गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात
पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार रात 9:30 बजे से 10 बजे के बीच विश्रांतवाड़ी में घटी। सागर ने शराब खरीदने के लिए पैसे मांगे, जिसे लेकर मां-बेटे के बीच तीखी कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि सागर ने चाकू उठाकर अपनी मां की गर्दन पर वार कर दिया। सविता हरिभक्त की मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं
विश्रांतवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक राजेंद्र पन्हाले ने घटना की पुष्टि की। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी सागर को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को कुछ मनोवैज्ञानिक और व्यवहार संबंधी समस्याएं हैं, जिसे जांच में ध्यान में रखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि: मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक हिंसा की चिंताजनक तस्वीर
गौरतलब है कि इससे पहले जून में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक मिलती-जुलती घटना सामने आई थी। राधा स्काई गार्डन्स सोसाइटी में रहने वाले 21 वर्षीय सागर यादव ने कथित तौर पर अपनी मां पर चाकू से हमला किया था। सेंट्रल नोएडा के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया था, 'मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने पाया कि पीड़ित मानसिक रूप से अस्वस्थ था। उसका अपनी मां से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद उसने चाकू उठाया और उस पर हमला कर दिया।' उस मामले में मां को मामूली चोटें आई थीं और उनकी हालत स्थिर बताई गई थी। घटना के बाद युवक ने अपने पांचवीं मंजिल के फ्लैट से कूदकर आत्महत्या कर ली थी और पास के अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
जांच की स्थिति
पुणे मामले में पुलिस ने बताया कि आरोपी सागर हरिभक्त की मनोवैज्ञानिक स्थिति की जांच की जा रही है। मामले की आगे की विवेचना जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मादक पदार्थों पर निर्भरता और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी पारिवारिक हिंसा की घटनाओं को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारकों में से हैं।