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क्या पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में बदलाव नहीं होगा? अश्विनी शर्मा ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया

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क्या पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में बदलाव नहीं होगा? अश्विनी शर्मा ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया

सारांश

केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट में किए गए बदलावों को रद्द कर दिया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए अश्विनी शर्मा ने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया। यह निर्णय छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जो पंजाब की शांति और प्रगति में योगदान करेगा।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में बदलाव रद्द किए।
छात्रों की मांगों को स्वीकार किया गया।
अश्विनी शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।
प्रदेश में शांति और प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।
सीनेट और सिंडिकेट की मौजूदा संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा।

नई दिल्ली, 7 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट में किए गए बदलावों को रद्द कर दिया है। पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और पठानकोट विधायक अश्विनी शर्मा ने इस निर्णय पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार प्रकट किया।

अश्विनी शर्मा ने शुक्रवार को 'एक्स' पर लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का धन्यवाद, जिन्होंने पंजाबियों की भावनाओं को समझते हुए पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में प्रस्तावित बदलावों को पूरी तरह से वापस लेने का निर्णय लिया। पंजाब भाजपा हमेशा पंजाब के अधिकारों के लिए खड़ी रही है और पंजाब की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए कार्य करती रहेगी। जय हिंद।"

इस निर्णय के संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि छात्रों की मांगों को स्वीकार किया गया है और अब पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में कोई बदलाव नहीं होगा। पहले प्रस्तावित बदलाव में ऑर्डिनरी फेलो की संख्या को 24 तक सीमित किया गया था। इसके अलावा, धारा-14 और धारा-37 को हटाने का भी प्रस्ताव था। साथ ही, पदेन और निर्वाचित सदस्यों की संरचना में भी संशोधन किया गया था।

वास्तव में, 2 मार्च 2021 को विश्वविद्यालय के कुलाधिपति द्वारा एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट के गठन और संरचना में संशोधन का सुझाव दिया था। इसी आधार पर, भारत सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 72(1), (2) और (3) के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए एक अधिसूचना जारी की थी, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट की संरचना में बदलाव किए गए थे।

शिक्षा मंत्रालय के निर्णय के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों द्वारा आपत्तियां व्यक्त की गई थीं। इस अधिसूचना के बाद विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों, शिक्षकों, पूर्व कुलपतियों और वर्तमान कुलपति ने अपनी आपत्तियां और सुझाव शिक्षा मंत्रालय को भेजे थे।

छात्र संगठनों ने भी शिक्षा मंत्रालय के साथ हुई बैठकों में इस परिवर्तन को रद्द करने की मांग की। इन सभी सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने निर्णय लिया कि सीनेट और सिंडिकेट की संरचना में किए गए परिवर्तन संबंधी आदेश को रद्द किया जाता है। इसका अर्थ है कि अब पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट और सिंडिकेट की मौजूदा संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह छात्रों और हितधारकों की भावनाओं का सम्मान करता है। यह कदम राज्य में शांति और विकास को प्रोत्साहित करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में बदलाव क्यों रद्द किए गए?
केंद्र सरकार ने छात्रों की मांगों को ध्यान में रखते हुए सीनेट में किए गए बदलावों को रद्द करने का निर्णय लिया।
इस फैसले पर अश्विनी शर्मा का क्या कहना है?
अश्विनी शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने पंजाबियों की भावनाओं को समझा।
पंजाब विश्वविद्यालय की सीनेट में बदलाव के क्या प्रभाव थे?
पहले के बदलावों में ऑर्डिनरी फेलो की संख्या को सीमित करना और कुछ धाराओं को हटाना शामिल था।
राष्ट्र प्रेस
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