क्या रायबरेली में 20 जनवरी को 'मनरेगा चौपाल' में राहुल गांधी शामिल होंगे?
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा बचाओ संग्राम का उद्देश्य ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
- 20 जनवरी को राहुल गांधी रायबरेली में चौपाल में शामिल होंगे।
- यह आंदोलन पंचायत स्तर तक पहुंच रहा है।
- सरकार द्वारा किए गए बदलावों का विरोध किया जा रहा है।
- आंदोलन में आम जनता और श्रमिकों को शामिल किया जाएगा।
नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने जानकारी दी है कि रविवार को ‘मनरेगा बचाव संग्राम’ पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में इस संग्राम को पंचायत स्तर पर बढ़ाने के लिए प्रयासों पर जोर देने का निर्णय लिया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केसी वेणुगोपाल ने साझा किया कि हमने देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए पीसीसी अध्यक्ष, जनरल सेक्रेटरी/इंचार्ज और मनरेगा समन्वय समिति के सदस्यों के साथ एक व्यापक ऑनलाइन बैठक की।
उन्होंने बताया कि समीक्षा में कई राज्यों में हमारे आंदोलन की बढ़ती पहुंच और सफलता पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक के दौरान हमने पंचायत स्तर पर लोगों तक अधिक पहुंच बनाने का निर्णय लिया, जिसमें आम जनता, मनरेगा श्रमिक और अन्य हितधारक शामिल होंगे। इस प्रक्रिया के बाद वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे और उसके बाद विधानसभा/लोकभवन घेराव तथा जोनल रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को और अधिक मजबूत करते हुए, 20 जनवरी को राहुल गांधी रायबरेली में एक मनरेगा चौपाल में भाग लेंगे, ताकि ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान को मजबूत किया जा सके।
केसी वेणुगोपाल ने एक्स पर यह भी उल्लेख किया कि मनरेगा बचाओ संग्राम, जनविरोधी ‘वीबी-जी राम जी’ कानून के खिलाफ विरोध की एक किरण बनकर उभरा है और मनरेगा की रक्षा के लिए एक मजबूत लड़ाई है। यह आंदोलन पूरे देश में फैल रहा है और मजदूरों और पंचायतों में उत्साह भर रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प दृढ़ है, हमारा आंदोलन बढ़ रहा है और इसका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक कि मनरेगा अपने मूल रूप में वापस नहीं आ जाता।
ज्ञात रहे कि सरकार ने मनरेगा के नियमों में कुछ संशोधन किए हैं और इसका नाम ‘वीबी जी राम जी’ रखा गया है। सरकार का दावा है कि इसमें सकारात्मक बदलाव किए गए हैं, लेकिन कांग्रेस समेत कई दलों ने इसका विरोध किया है और नाम बदलने की आलोचना की है।