क्या राहुल गांधी को चीन की तारीफ करने से पहले कांग्रेस का इतिहास पढ़ना चाहिए?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी को कांग्रेस का इतिहास जानना होगा।
- चीन की तुलना भारत से करने में सावधानी बरतनी चाहिए।
- भाजपा सरकार की समीक्षा महत्वपूर्ण है।
- सांप्रदायिक राजनीति का निवारण आवश्यक है।
- चिप निर्माण के लिए नवीनतम नीतियाँ लागू की गई हैं।
नई दिल्ली, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा की नेता शाजिया इल्मी ने लोकसभा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी द्वारा चीन और भारत की तुलना करने पर कड़ा विरोध किया है। उन्होंने यह कहा कि चीन की प्रशंसा करने से पहले राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी का इतिहास अवश्य पढ़ लेना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस से नई दिल्ली में बातचीत में शाजिया इल्मी ने कहा कि मेरा मानना है कि राहुल गांधी को पहले अपनी पार्टी के इतिहास और उसकी पूर्व आर्थिक नीतियों का गहरा अध्ययन करना चाहिए। इससे उन्हें ऐसे बयान देने से बचने में सहायता मिलेगी। चीन केवल भाषणों के कारण मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस नहीं बना; यह इसलिए बना क्योंकि उसने सही समय पर साहसिक और ठोस निर्णय लिए, जो कांग्रेस सरकार करने में पूरी तरह असफल रही।
शाजिया इल्मी ने कहा कि राहुल गांधी चीन का उदाहरण देकर भारत में खामियां ढूंढ रहे हैं। कांग्रेस सरकार की नाकामी के चलते ही चीन को आगे बढ़ने का अवसर मिला। यूपीए सरकार के दौरान तकनीक को फाइलों तक सीमित रखा गया। हैरानी की बात है कि 2005-06 में इंटेल ने भारत में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने की इच्छा जताई थी, लेकिन तब की सरकार अपनी नीतियों में उलझी रही और यह अवसर गंवा दिया।
उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब भाजपा सरकार में काफी बदलाव हो चुका है। सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए राष्ट्रीय नीति बनाई गई है और 80 हजार करोड़ रुपये का विशेष कार्यक्रम आरंभ किया गया है। बड़ी कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं, और 'मेड इन इंडिया' चिप्स अब वास्तविकता बन चुके हैं। राहुल गांधी चीन की तारीफ कर भारत की क्षमताओं पर विश्वास नहीं दिखा रहे। वे अपने ही देश में खामियां खोजते रहते हैं और भारत की अर्थव्यवस्था को 'डेड' तक कह चुके हैं।
मौलाना अरशद मदनी के बयान पर भाजपा नेता ने कहा कि मदनी जिस बात का जिक्र कर रहे हैं, वास्तव में हमारे देश में उसका उलटा हुआ है। सांप्रदायिक राजनीति और समाज को बांटने वाली सोच को रोकने के बजाय कांग्रेस पार्टी ने इसे लगातार बढ़ावा दिया है। कांग्रेस की राजनीति पूरी तरह सांप्रदायिक रही है और तुष्टीकरण की नीति पर आधारित रही है, जहां धर्म के नाम पर राजनीति हुई और समान नागरिक अधिकारों का हनन हुआ। कांग्रेस ने हिंदू-मुस्लिम की राजनीति का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि नफरत और विभाजन की जिम्मेदारी कांग्रेस की है। यह बात भी मदनी को स्पष्ट करनी चाहिए थी।