राहुल गांधी का ऐलान: PM मोदी से लेकर सिपाही तक को मिलेगी सजा, छात्रों के साथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार और पुलिस के सिपाहियों तक — सभी को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी अपने साथ कुछ छात्रों को भी लेकर आए, जिन्होंने पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई मारपीट का विवरण सार्वजनिक किया।
राहुल गांधी का सीधा संदेश
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, "जैसा कि मैंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, यह भारत है। अमित शाह जी, इसे अच्छी तरह देखिए। यहाँ कोई हिंदू नहीं, कोई मुसलमान नहीं, किसी खास जाति का कोई नहीं, कोई महिला नहीं, कोई पुरुष नहीं। एक ही आवाज़ है, एक ही विरोध है। यह भारत की आवाज़ है और आप इस आवाज़ के खिलाफ खड़े हैं। प्रधानमंत्री इस आवाज़ के खिलाफ खड़े हैं। मैं आपको सुझाव देता हूँ कि इस आवाज़ के खिलाफ मत खड़े होइए। कोई भी इस आवाज़ के खिलाफ नहीं खड़ा हो सकता।"
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सभी छात्रों से वीडियो और सबूत सुरक्षित रखने को कहा है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, "जब यह पूरा मामला खत्म होगा, तो हम उन सभी सबूतों का उपयोग करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिसे सजा मिलनी चाहिए उसे सजा मिले। प्रधानमंत्री से लेकर ज्ञानेश कुमार, अमित शाह और यहाँ तक कि वह सिपाही भी जो हमारे बच्चों पर हाथ उठा रहे हैं, उन्हें सजा मिलेगी।"
छात्रों का कथित पुलिस उत्पीड़न का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर बताया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत के दौरान कहा — "बोलो, दिल्ली पुलिस तुम्हारे पापा हैं।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अंकित कसाना नामक एक पुलिसकर्मी ने कहा, "बुला ले अपने नेता को, तुम्हें कोई बचाने नहीं आएगा।" धर्मेंद्र ने कहा, "हम फिर प्रदर्शन में जाएंगे, लेकिन अन्याय के खिलाफ झुकेंगे नहीं।"
एक अन्य छात्र समर्थ ने बताया कि वे 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे और 5 अक्टूबर को उन्हें हिरासत में लिया गया। उनके अनुसार, उन्हें पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन ले जाकर वहाब सिंह तोमर नामक पुलिसकर्मी समेत करीब 20 पुलिसवालों ने कथित तौर पर मारपीट की। समर्थ ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीछे के रास्ते से दिल्ली कैंट तक ले जाया गया और रास्ते भर कांस्टेबल अंकित कसाना ने मारपीट की। धर्मेंद्र के उल्टी आने की शिकायत पर पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर कहा कि अपना बैग खोलो और उसी में उल्टी करो।
सरकार और पुलिस की स्थिति
इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस या केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस खबर के प्रकाशन तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब छात्र आंदोलनों और पुलिस की भूमिका को लेकर देशभर में बहस तेज़ है।
आगे क्या होगा
राहुल गांधी ने संकेत दिया है कि छात्रों द्वारा एकत्र किए गए वीडियो और सबूतों को भविष्य में कानूनी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह देखना होगा कि विपक्ष इन आरोपों को संसद में और अदालत में किस रूप में उठाता है, और क्या सरकार की ओर से इस पर कोई जाँच या जवाब आता है।