राजनाथ सिंह का दुशांबे में ऐलान: 38 देशों से FTA, 7.2% विकास दर — भारत की ऐतिहासिक आर्थिक छलांग
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने अब तक लगभग 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) संपन्न किए हैं, जो देश के व्यापारिक इतिहास में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ मंदी से जूझ रही हैं, भारत 7.2 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर से आगे बढ़ रहा है।
व्यापार और आर्थिक प्रगति
राजनाथ सिंह ने कहा कि इन मुक्त व्यापार समझौतों ने विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बाज़ार भारत में निर्मित उत्पादों के लिए खोल दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से बाहर निकाला है — एक ऐसी संख्या जो दुनिया के कई देशों की संपूर्ण आबादी से भी अधिक है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी भारत की इस उपलब्धि की सराहना की है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत इस समय वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 16 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है। वित्तीय मजबूती का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, 'करीब 12-13 साल पहले करंट अकाउंट डेफिसिट GDP के 4 प्रतिशत से भी ऊपर था। पिछले साल यह घटकर लगभग 0.61 प्रतिशत रह गया है। आज हमारे विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक हैं और बैंकिंग व्यवस्था अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है।'
स्टार्टअप और डिजिटल क्रांति
उद्यमिता के मोर्चे पर राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले भारत में कुछ सैकड़ा ही स्टार्टअप थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर ढाई लाख से अधिक हो गई है। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि इन नए उद्यमों में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार हैं, जो नवाचार के अवसरों के व्यापक प्रसार को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सस्ते मोबाइल डेटा की उपलब्धता ने केवल लोगों को नहीं, बल्कि अवसरों को भी आपस में जोड़ा है।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में उन्होंने एकीकृत भुगतान व्यवस्था (UPI) के आँकड़े साझा करते हुए कहा, 'केवल अगस्त महीने में रिकॉर्ड 23.66 अरब UPI लेनदेन हुए, जिनका मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ रहा — यह एक नया रिकॉर्ड है।' उन्होंने यह भी बताया कि अब UPI की सुविधा कई देशों तक विस्तारित हो चुकी है।
ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में उपलब्धियाँ
नवीकरणीय ऊर्जा के संदर्भ में रक्षा मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 75 गीगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 300 गीगावाट हो गई है — यानी लगभग चार गुना वृद्धि। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और जल्द ही घरेलू सेमीकंडक्टर चिप इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में प्रयुक्त होने लगेगी।
उन्होंने चंद्रयान और आदित्ययान की सफलताओं का स्मरण करते हुए कहा कि मिशन गगनयान की तैयारियाँ भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यह सब मिलकर दर्शाता है कि भारत केवल सेवा क्षेत्र में नहीं, बल्कि उन्नत प्रौद्योगिकी और विनिर्माण में भी वैश्विक पहचान बना रहा है।
क्या होगा आगे
दुशांबे से आया यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत कई बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आर्थिक उपलब्धियों को कूटनीतिक प्रभाव में बदलने की कोशिश कर रहा है। 38 देशों के साथ FTA नेटवर्क और बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार, भारत की व्यापार कूटनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत हैं। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये समझौते निर्यात वृद्धि और रोज़गार सृजन के रूप में जमीन पर कितने उतरते हैं।