क्या राज्य मंत्रियों और सचिवों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां दी गईं हैं: चंद्रशेखर बावनकुले

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क्या राज्य मंत्रियों और सचिवों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां दी गईं हैं: चंद्रशेखर बावनकुले

सारांश

राज्य मंत्रियों और सचिवों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां देने का निर्णय राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक के तहत लिया गया है। इसके माध्यम से लंबित अपीलों का निपटारा तेजी से किया जाएगा। क्या यह निर्णय वास्तव में राजस्व विभाग के मामलों को सुलझाने में मदद करेगा?

Key Takeaways

  • राज्य मंत्रियों और सचिवों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां मिलेंगी।
  • लंबित मामलों का निपटारा 90 दिनों में किया जाएगा।
  • विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
  • उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन होगा।
  • बावनकुले का आश्वासन: मार्च तक कानूनी संशोधन होंगे।

नागपुर, 11 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। राज्य विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता संशोधन विधेयक, 2025 को मंजूरी दी, जिसके माध्यम से राज्य मंत्रियों (एमओएस) और सचिवों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां प्रदान की जाएंगी।

यह निर्णय राजस्व विभाग में लंबित मामलों की संख्या को कम करने और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के उद्देश्य से लिया गया है।

इस संशोधन के तहत, अब राज्य मंत्री और सचिवों को राजस्व मंत्री के समक्ष लंबित अपीलों की सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त होगा।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधेयक पेश करते समय बताया कि वर्तमान में राजस्व विभाग में 13,000 से अधिक अर्ध-न्यायिक मामले लंबित हैं।

उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर पीठ के निर्णय के अनुसार, मंत्रिस्तरीय शक्तियों का वितरण केवल नियमों के माध्यम से नहीं किया जा सकता, इसके लिए कानून में बदलाव की आवश्यकता थी, इसी कारण से यह विधेयक प्रस्तुत किया गया।

मंत्री बावनकुले ने कहा कि हम उप तहसीलदार से लेकर मंत्री स्तर तक की सभी अपीलों का निपटारा 90 दिनों के भीतर करने की योजना बना रहे हैं। मार्च सत्र तक आवश्यक कानूनी संशोधन किए जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाए और सुनवाई में कोई देरी न हो।

विपक्षी सदस्यों ने चर्चा के दौरान महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। शिवसेना के यूबीटी विधायक भास्कर जाधव ने पूछा कि यदि मंत्री की शक्तियों को राज्य मंत्री को सौंपने के लिए कानून की आवश्यकता है, तो यह नियम केवल राजस्व विभाग तक ही सीमित क्यों है? अन्य विभागों के मंत्रियों का क्या? यह निर्णय सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा सामूहिक रूप से लिया जाना चाहिए था। इसके अतिरिक्त, राज्य मंत्री को दी गई शक्तियों की सीमाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित की जानी चाहिए।

इस दौरान विधायक जयंत पाटिल, विजय वडेट्टीवार और अभिजीत पाटिल भी उपस्थित थे। पाटिल ने यह उल्लेख किया कि हजारों मामले न केवल मंत्रालय में बल्कि निचले स्तर पर भी लंबित हैं।

वडेट्टीवार ने यह कहा कि केवल 90 दिन का नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, इसका कड़ाई से पालन होना आवश्यक है। अंततः, राजस्व मंत्री द्वारा अगले वर्ष मार्च में व्यापक संशोधनों का आश्वासन मिलने के बाद, विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया।

Point of View

यह स्पष्ट है कि यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य राजस्व मामलों में तेजी लाना है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह प्रक्रिया प्रभावी और पारदर्शी हो। हमें देखना होगा कि क्या ये सुधार वास्तव में लागू होते हैं और आम जनता को इसका लाभ मिलता है।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

क्या राज्य मंत्रियों को अर्ध-न्यायिक शक्तियां देने का निर्णय सही है?
यह निर्णय लंबित मामलों को जल्दी निपटाने का एक प्रयास है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता महत्वपूर्ण है।
कितने मामले अभी भी लंबित हैं?
राजस्व विभाग में वर्तमान में 13,000 से अधिक अर्ध-न्यायिक मामले लंबित हैं।
यह विधेयक कब पारित हुआ?
यह विधेयक 11 दिसंबर को राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ।
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