क्या रांची में रिम्स-2 पर सियासी बवाल थमने वाला है?

सारांश
Key Takeaways
- रिम्स-2 के लिए भूमि अधिग्रहण पर आदिवासियों का विरोध जारी है।
- चंपई सोरेन ने 'आदिवासी महादरबार' का आयोजन किया है।
- आंदोलन में डेढ़ से दो लाख लोग शामिल होने की संभावना है।
- सरकार को इस मुद्दे को संवेदनशीलता से समझने की आवश्यकता है।
- आदिवासी किसानों के हक की लड़ाई जारी रहेगी।
रांची, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। रांची के नगड़ी क्षेत्र में नए मेडिकल कॉलेज रिम्स-2 के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर आदिवासी रैयतों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति जारी है। इसी बीच, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इस परियोजना के विरोध में आगामी 5 से 11 अक्टूबर के बीच रिम्स-2 के लिए चिन्हित भूमि के पास 'आदिवासी महादरबार' आयोजित करने का ऐलान किया है।
गुरुवार को झारखंड विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी किसानों के हक की लड़ाई किसी भी हाल में नहीं थमेगी। उन्हें यह कल्पना भी नहीं थी कि यह सरकार खेती-किसानी करने वाले आदिवासी किसानों के साथ ऐसा व्यवहार करेगी।
उन्होंने कहा कि रिम्स-2 के लिए जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ लगने वाले आदिवासी महादरबार में पूरे राज्य से डेढ़ से दो लाख लोग जुटेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन पर अवैध कब्जा दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अधिग्रहण की कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरा किए बिना किसानों को खेती से रोकने का आदेश किस आधार पर जारी किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध अस्पताल निर्माण के खिलाफ नहीं है, बल्कि बंजर या लैंड बैंक की जमीन उपलब्ध होते हुए भी आदिवासियों की उपजाऊ जमीन छीने जाने के खिलाफ है।
रिम्स-2 के खिलाफ आंदोलन में बाहर से भाड़े के लोगों को लाने के झारखंड सरकार के मंत्रियों के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि बाहरी बांग्लादेशियों को वे लोग बसा रहे हैं और हम पर ऐसा आरोप लगा रहे हैं। जिनकी जमीन और रोजी-रोटी छीनी जा रही है, वे लोग सड़क पर उतर रहे हैं तो गठबंधन सरकार को बुरा लग रहा है।
सोरेन ने याद दिलाया कि अलग झारखंड राज्य बनाने का संघर्ष हमेशा आदिवासी और मूलवासी के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ा गया। आज वही किसान अपनी जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।