क्या रविदासिया समाज के संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान मिलने पर विजय सांपला ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया?

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क्या रविदासिया समाज के संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान मिलने पर विजय सांपला ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया?

सारांश

संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान मिलने पर विजय सांपला ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। यह सम्मान संतों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रमाण है। जानिए संत निरंजन दास के जीवन और उनके कार्यों के बारे में।

Key Takeaways

  • संत निरंजन दास का योगदान महत्वपूर्ण है।
  • पद्मश्री सम्मान से समाज में संत-महापुरुषों की पहचान बढ़ी है।
  • विजय सांपला ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया।
  • डेरा बल्ला एक प्रमुख तीर्थस्थल है।
  • सामाजिक समरसता और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा दिया गया है।

नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने रविदासिया समाज एवं डेरा बल्ला के प्रमुख संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता विजय सांपला ने केंद्र सरकार के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।

विजय सांपला ने कहा कि संत निरंजन दास ने संत गुरु रविदास महाराज के विचारों को देश-विदेश में फैलाने के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सेवा और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया है। उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जाना न केवल रविदासिया समाज, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सम्मान समाज के संत-महापुरुषों द्वारा किए गए अमूल्य योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

संत निरंजन दास का जन्म ६ जनवरी १९४२ को जालंधर जिले के रामदासपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम साधु राम और माता का नाम रुक्मणी था। उनके माता-पिता श्री १०८ संत बाबा पीपल दास जी और श्री १०८ संत सरवन दास जी के भक्त थे।

डेरा श्री १०८ संत सरवन दास सचखंड बल्ला की स्थापना पंजाब के जालंधर जिले के बल्ला गांव में १९०० के दशक की शुरुआत में पीपल दास महाराज ने की थी। पीपल दास जी महान संत थे। वह अपने पांच साल के बेटे सरवन दास के साथ बठिंडा जिले के गिल पट्टी गांव से जालंधर जिले के बल्ला गांव आए।

पत्नी के निधन के बाद पीपल दास जी महाराज अपने पांच साल के बेटे के साथ बठिंडा जिले से जालंधर जिले के गांव बल्ला में आ गए। बताया जाता है कि बल्ला गांव में एक सूखा हुआ पीपल का पेड़ था, जिस पर पीपल दास जी नियमित रूप से पानी देने लगे। कुछ समय बाद पेड़ फिर से हरा-भरा हो गया।

पीपल दास महाराज ने गांव के लोगों को आसपास की भूमि दान करने के लिए प्रेरित किया और संगत ने कुछ भूमि दान भी की। इसके बाद संत सरवन दास महाराज ने वहीं तप शुरू किया और आज यह स्थान सतगुरु रविदास महाराज के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल बन गया है। देश-विदेश से सतगुरु रविदास महाराज के करोड़ों अनुयायी इस डेरा से जुड़े हैं।

गणतंत्र दिवस की पूर्ण संध्या पर केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री विजेताओं के नामों का ऐलान किया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में ५ पद्म विभूषण, १३ पद्म भूषण और ११३ पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार पाने वालों में से १९ महिलाएं हैं, और इस सूची में विदेशी, एनआरआई, पीआईओ, और ओसीआई श्रेणी के ६ व्यक्ति और १६ मरणोपरांत पुरस्कार पाने वाले भी शामिल हैं।

Point of View

NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

संत निरंजन दास का जन्म कब हुआ?
संत निरंजन दास का जन्म ६ जनवरी १९४२ को जालंधर जिले के रामदासपुर गांव में हुआ।
संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान कब मिला?
संत निरंजन दास को पद्मश्री सम्मान २५ जनवरी को प्राप्त हुआ।
विजय सांपला ने इस सम्मान पर क्या कहा?
विजय सांपला ने कहा कि यह सम्मान संत-महापुरुषों के अमूल्य योगदान को पहचान देता है।
डेरा बल्ला की स्थापना किसने की?
डेरा बल्ला की स्थापना पीपल दास महाराज ने की थी।
पद्मश्री पुरस्कार कितने श्रेणियों में दिए जाते हैं?
पद्मश्री पुरस्कार मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में दिए जाते हैं: पद्म विभूषण, पद्म भूषण, और पद्म श्री।
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