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आरबीआई गवर्नर का स्पष्ट बयान: प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकर लोन नियमों में कोई परिवर्तन नहीं

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आरबीआई गवर्नर का स्पष्ट बयान: प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकर लोन नियमों में कोई परिवर्तन नहीं

सारांश

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंकों द्वारा प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकरों को दिए जाने वाले ऋण नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा। यह घोषणा सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। जानिए इन नियमों का बाजार पर क्या असर होगा।

मुख्य बातें

आरबीआई ने प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकर लोन नियमों में बदलाव की योजना नहीं बनाई है।
नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे।
ब्रोकरों ने नियमों की समीक्षा की मांग की है।
महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत पर बनाए रखा जाएगा।
नए नियमों से बाजार में गिरावट की संभावना है।

नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्पष्ट किया है कि हाल ही में जारी उन नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जो बैंकों द्वारा प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकरों को दिए जाने वाले ऋण से जुड़े हैं। यह जानकारी सोमवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साझा की।

इस माह की शुरुआत में लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, आरबीआई ने ब्रोकरों को दी जाने वाली बैंक गारंटी के लिए कोलेटरल (गिरवी) की शर्तों को सख्त कर दिया है। इसके अतिरिक्त, बैंकों को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरों को ऋण देने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ये नियम 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।

इन नियमों के बाद पिछले सप्ताह ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। बाजार में चिंता जताई जा रही है कि नए नियमों के कारण ब्रोकरों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम भी घट सकता है। ब्रोकरों ने इन नियमों की समीक्षा करने की मांग करते हुए बाजार नियामक को एक पत्र भी भेजा है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बोर्ड बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये नियम व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं।

उन्होंने स्पष्ट कहा, "इन नियमों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने पर विचार नहीं किया जा रहा है।"

गवर्नर ने यह भी बताया कि आरबीआई ने भारत के महंगाई लक्ष्य (इन्फ्लेशन टार्गेटिंग) ढांचे पर अपनी सिफारिशें सरकार को भेज दी हैं। यह समीक्षा मार्च के अंत तक होनी है। हालांकि, उन्होंने सिफारिशों का विवरण साझा नहीं किया।

भारत में आरबीआई को खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक का दायरा तय किया गया है। इस लक्ष्य की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

हाल ही में भारत ने खुदरा महंगाई के आंकड़ों की गणना पद्धति में बदलाव किया है, जिसमें महंगाई मापने वाली टोकरी में खाद्य पदार्थों का हिस्सा कम किया गया है।

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि इन बदलावों का आरबीआई के महंगाई लक्ष्य पर अपने आप कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हालांकि ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में गिरावट का असर निवेशकों पर पड़ सकता है। यह निर्णय व्यापक परामर्श के बाद लिया गया है, जो संकेत देता है कि आरबीआई अपने नियमों को स्थिरता देने का प्रयास कर रहा है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने ब्रोकरों के लिए नए नियम क्यों बनाए हैं?
आरबीआई ने ब्रोकरों के लिए नए नियम इसलिए बनाए हैं ताकि बाजार में स्थिरता लाई जा सके और जोखिम को कम किया जा सके।
नए नियम कब से लागू होंगे?
नए नियम 1 अप्रैल से लागू होंगे।
इन नियमों का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
नए नियमों के कारण ब्रोकरेज कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
आरबीआई के महंगाई लक्ष्य क्या हैं?
आरबीआई का खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य है, जिसमें 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक का दायरा है।
क्या इन नियमों में कोई बदलाव होगा?
आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि इन नियमों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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