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जम्मू-कश्मीर में डॉक्टरों पर हमले: एआईएमएसए ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की माँग की

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जम्मू-कश्मीर में डॉक्टरों पर हमले: एआईएमएसए ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने की माँग की

सारांश

जम्मू-कश्मीर के दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों पर हमलों के बाद एआईएमएसए ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। संगठन ने अस्पतालों में सीसीटीवी, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड और एक राष्ट्रीय नीति की माँग की है — क्योंकि डॉक्टरों की सुरक्षा ही स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव है।

मुख्य बातें

एआईएमएसए के उपाध्यक्ष डॉ.
मोहम्मद मोमिन खान ने 28 अप्रैल 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में डॉ.
ज़ामिन पर हमले की घटनाएँ सामने आईं।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बारामूला में डॉ.
मुस्तफा पर कथित तौर पर हमला हुआ।
एआईएमएसए ने अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी , प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाने की माँग की।
संगठन ने डॉक्टरों पर हिंसा के मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई और त्वरित जाँच की अपील की।

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएमएसए) ने 28 अप्रैल 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा तत्काल सुदृढ़ करने की माँग की है। संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने पत्र में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग और गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बारामूला में चिकित्सकों पर हुए हमलों का हवाला देते हुए सीसीटीवी निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और एक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाने की अपील की है।

मुख्य घटनाक्रम

एआईएमएसए के उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में डॉ. ऐनुल हुदा और डॉ. ज़ामिन सहित पैरामेडिकल स्टाफ पर हमले की घटनाएँ सामने आई हैं। इसके अतिरिक्त, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बारामूला में डॉ. मुस्तफा पर कथित तौर पर हमला किया गया। ये घटनाएँ जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य समुदाय में भय और असुरक्षा की बढ़ती भावना को रेखांकित करती हैं।

एआईएमएसए की प्रमुख माँगें

डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने पत्र में गृह मंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी केंद्रीय स्तर पर कोई ठोस कानूनी ढाँचा अब तक नहीं बन पाया है। एआईएमएसए की यह माँग तब और प्रासंगिक हो जाती है जब जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्वास्थ्यकर्मी पहले से ही कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के स्तर पर पत्र लिखना संगठन की बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस बार नीतिगत प्रतिक्रिया केवल आश्वासन तक सीमित रहेगी या वास्तविक सुरक्षा तंत्र खड़ा होगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएमएसए ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र क्यों लिखा?
एआईएमएसए ने जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों पर हुए हमलों के मद्देनजर गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। संगठन ने अस्पतालों में तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने और एक राष्ट्रीय नीति बनाने की माँग की है।
जम्मू-कश्मीर में किन डॉक्टरों पर हमले हुए?
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में डॉ. ऐनुल हुदा और डॉ. ज़ामिन सहित पैरामेडिकल स्टाफ पर हमले की घटनाएँ सामने आई हैं। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बारामूला में डॉ. मुस्तफा पर कथित तौर पर हमला किया गया।
एआईएमएसए ने डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए क्या माँगें रखी हैं?
एआईएमएसए ने अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन क्षेत्रों में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, डॉक्टरों पर हिंसा के मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की माँग की है।
डॉक्टरों पर हमले भारत में कितनी बड़ी समस्या है?
भारत में चिकित्सा पेशेवरों पर हिंसा की घटनाएँ लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं और देशभर के अस्पतालों में ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए अब तक कोई केंद्रीय स्तर का व्यापक कानूनी ढाँचा नहीं बन पाया है।
इस पत्र के बाद आगे क्या होने की उम्मीद है?
एआईएमएसए ने गृह मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप और आवश्यक कार्रवाई की अपील की है। संगठन को उम्मीद है कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करेगी और एक राष्ट्रीय नीति तैयार करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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