AAP की कोई विचारधारा नहीं, सत्ता के लिए हर हद पार करने को तैयार: कांग्रेस नेता पवन बंसल
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सारांश
सात राज्यसभा सांसदों के AAP छोड़ने के बाद कांग्रेस नेता पवन बंसल ने पार्टी पर सीधा हमला बोला — 'न विचारधारा है, न नैतिकता।' अन्ना आंदोलन से उपजी AAP का यह बिखराव केजरीवाल की राजनीति पर गहरे सवाल खड़े करता है।
Key Takeaways
- कांग्रेस नेता पवन बंसल ने 28 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ में AAP को विचारधाराहीन पार्टी बताया।
- राघव चड्ढा सहित 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा।
- बंसल ने दावा किया कि BJP ने AAP का उपयोग एक 'टूल' के रूप में किया।
- AAP नेता मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर केस से हटने की अपील की, जिसे जज ने अस्वीकार कर दिया।
- बंसल ने कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद इस तरह पार्टी छोड़ना अनैतिक है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन बंसल ने 28 अप्रैल 2026 को चंडीगढ़ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में आम आदमी पार्टी (AAP) पर कड़े आरोप लगाए। यह बयान ऐसे समय में आया जब राघव चड्ढा सहित सात राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। बंसल ने दावा किया कि AAP की कोई वैचारिक नींव नहीं है और यह पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
मुख्य आरोप और बयान
पवन बंसल ने कहा,
Point of View
NationPress
29/04/2026
Frequently Asked Questions
पवन बंसल ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता पवन बंसल ने कहा कि AAP की कोई विचारधारा नहीं है और यह पार्टी सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि BJP ने AAP का एक 'टूल' के रूप में इस्तेमाल किया।
AAP के कितने राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी?
राघव चड्ढा सहित सात राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर BJP में शामिल होने की खबर है। बंसल ने इसे अनैतिक करार देते हुए कहा कि राज्यसभा सदस्य बनने के बाद इस तरह पार्टी बदलना उचित नहीं है।
मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र क्यों लिखा?
AAP नेता मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर उनसे अपने केस से हटने की अपील की। हालांकि जज ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'फोरम शॉपिंग' की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पवन बंसल के अनुसार AAP का गठन किस उद्देश्य से हुआ था?
बंसल के अनुसार AAP का गठन अन्ना आंदोलन के दौरान स्वार्थ के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि आंदोलन में केजरीवाल के साथ जुड़े लोग एक-एक करके इसलिए छोड़ते गए क्योंकि केजरीवाल खुद को आम आदमी से ऊपर समझने लगे।
AAP की इस टूट का राजनीतिक असर क्या होगा?
सात राज्यसभा सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने से AAP की संसदीय ताकत कमज़ोर होती है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और नेतृत्व के केंद्रीकरण को उजागर करता है, जिसका असर आगामी चुनावों में देखा जा सकता है।