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रिंकू सिंह की प्रेरक कहानी: पोछा लगाने का काम ठुकराया, IPL में ₹80 लाख का सफर तय किया

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रिंकू सिंह की प्रेरक कहानी: पोछा लगाने का काम ठुकराया, IPL में ₹80 लाख का सफर तय किया

सारांश

पोछा लगाने की नौकरी और क्रिकेट के बीच चुनाव — रिंकू सिंह ने बल्ला थामा। अलीगढ़ से शुरू हुआ वह सफर गुजरात टाइटंस के खिलाफ पाँच लगातार छक्कों और KKR के ₹80 लाख के सौदे से होते हुए भारतीय टीम तक पहुँचा। यह सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं, एक परिवार की तकदीर बदलने की कहानी है।

मुख्य बातें

रिंकू सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1997 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ; पिता गैस सिलेंडर वितरण का काम करते थे।
आर्थिक संकट के बीच कोचिंग सेंटर में पोछा लगाने का काम मिला, लेकिन रिंकू ने क्रिकेट न छोड़ने की खातिर वह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।
2018 में KKR ने ₹80 लाख में रिंकू को खरीदा, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया।
IPL 2023 में गुजरात टाइटंस के खिलाफ लगातार 5 छक्के लगाकर ऐतिहासिक जीत दिलाई; उस सीज़न 59.25 की औसत से 474 रन बनाए।
भारत के लिए 48 T20I में 702 रन और 2 वनडे में 55 रन ; IPL में 73 मैचों में 1,394 रन ।

अलीगढ़ के एक साधारण परिवार में जन्मे क्रिकेटर रिंकू सिंह आज भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित फिनिशरों में से एक हैं — लेकिन यह मुकाम उन्होंने कठिन संघर्ष और हार न मानने की जिद से हासिल किया। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए ऐतिहासिक प्रदर्शन से पहले, रिंकू एक ऐसे मोड़ पर खड़े थे जहाँ उनके सामने कोचिंग सेंटर में पोछा लगाने की नौकरी का प्रस्ताव था। उन्होंने वह नौकरी ठुकरा दी और क्रिकेट के मैदान पर वापस लौटे — और यही फैसला उनकी ज़िंदगी बदल गया।

अलीगढ़ से मैदान तक: शुरुआती संघर्ष

12 अक्टूबर 1997 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जन्मे रिंकू सिंह के पिता घर-घर गैस सिलेंडर पहुँचाने का काम करते थे। पाँच भाइयों वाले इस परिवार में आर्थिक तंगी आम बात थी। रिंकू को बचपन से ही क्रिकेट से गहरा लगाव था — स्कूल के दिनों में भी वे पढ़ाई से ज़्यादा बल्ले-गेंद में रुचि लेते थे।

पिता इस लगाव को समय की बर्बादी मानते थे, और कभी-कभी रिंकू को इसके लिए डाँट-फटकार भी सहनी पड़ती। गेंद खरीदने के पैसे न होने पर पड़ोसी और परिचितों ने उनकी मदद की। भाइयों ने हमेशा उनका साथ दिया, जो इस कठिन दौर में रिंकू के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित हुए।

वह अहम मोड़ — जब नौकरी ठुकराई

परिवार की आर्थिक तंगी के चलते एक वक्त रिंकू क्रिकेट से दूर होने लगे। उनके भाई उन्हें रोज़गार दिलाने के लिए एक कोचिंग सेंटर ले गए, जहाँ पोछा लगाने का काम उपलब्ध था। लेकिन रिंकू को लगा कि यह काम स्वीकार करने पर उनका क्रिकेट हमेशा के लिए छूट जाएगा। उन्होंने वह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया और एक बार फिर बल्ला थाम लिया।

यह फैसला आसान नहीं था — घर में पैसों की किल्लत थी और भविष्य अनिश्चित। फिर भी रिंकू ने क्रिकेट पर भरोसा बनाए रखा।

मार्गदर्शन और अंडर-16 संघर्ष

रिंकू की निगाहें अंडर-16 टीम में जगह पाने पर टिकी थीं, लेकिन वे दो बार पहले ही राउंड में बाहर हो चुके थे। इस कठिन दौर में मोहम्मद जीशान और मसूद अमीन ने उनका मार्गदर्शन किया। इन दोनों के सहयोग से रिंकू की तकनीक और मानसिक दृढ़ता में निखार आया, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

IPL में छलाँग और परिवार की तस्वीर बदली

साल 2017 में पंजाब किंग्स ने रिंकू को ₹10 लाख में अपने दस्ते में शामिल किया, हालाँकि उस सीज़न उन्हें मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला। असली बदलाव तब आया जब 2018 में KKR ने उन पर ₹80 लाख का दाँव लगाया। इस राशि ने परिवार की वर्षों पुरानी आर्थिक मुश्किलों को काफी हद तक दूर कर दिया।

IPL 2023 में रिंकू का प्रदर्शन देशभर में चर्चा का विषय बना। गुजरात टाइटंस के खिलाफ आखिरी ओवर में लगाए गए पाँच लगातार छक्कों ने उन्हें रातों-रात राष्ट्रीय नायक बना दिया। उस सीज़न में उन्होंने KKR के लिए 14 मुकाबलों में 59.25 की औसत से 474 रन बनाए।

अंतरराष्ट्रीय करियर और आँकड़ों की बात

आईपीएल के शानदार प्रदर्शन के बाद रिंकू को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए खेलने का मौका मिला। इसके बाद दिसंबर 2023 में उन्होंने भारत के लिए पहला वनडे मैच भी खेला।

अब तक रिंकू ने भारत के लिए 48 टी20 मुकाबलों में 36.94 की औसत से 702 रन बनाए हैं, जिनमें 3 अर्धशतक शामिल हैं। 2 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 55 रन जोड़े हैं। घरेलू स्तर पर, इस बाएँ हाथ के बल्लेबाज ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 3,757 रन और लिस्ट-ए क्रिकेट में 2,418 रन अपने नाम किए हैं। 73 IPL मुकाबलों में उनके बल्ले से 1,394 रन निकले हैं।

अलीगढ़ की गलियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच तक — रिंकू सिंह की यात्रा बताती है कि सीमित संसाधन और विपरीत परिस्थितियाँ उस इरादे को नहीं तोड़ सकतीं जो सच्चे जुनून से बना हो। आने वाले सीज़न में रिंकू से भारतीय फिनिशर की भूमिका में और अधिक परिपक्वता की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संसाधनों की कमी ही सबसे बड़ी बाधा है। रिंकू के मामले में किसी अकादमी या कॉर्पोरेट बैकिंग ने नहीं, बल्कि दो मेंटरों और भाइयों के अनौपचारिक समर्थन ने अंतर पैदा किया। यह सवाल पूछना ज़रूरी है कि ऐसे कितने रिंकू उस मोड़ पर गलत दिशा में मुड़ जाते हैं, जहाँ संरचित सहयोग का अभाव उन्हें मैदान से दूर कर देता है। IPL की करोड़ों की बोली एक व्यक्ति की ज़िंदगी तो बदल देती है, लेकिन व्यवस्था को नहीं।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिंकू सिंह ने पोछा लगाने की नौकरी क्यों ठुकराई?
रिंकू सिंह को डर था कि यह नौकरी स्वीकार करने पर उनका क्रिकेट हमेशा के लिए छूट जाएगा। परिवार की आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने वह प्रस्ताव अस्वीकार किया और दोबारा क्रिकेट खेलने का फैसला लिया।
रिंकू सिंह का जन्म कहाँ और कब हुआ?
रिंकू सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1997 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ। उनके पिता घर-घर गैस सिलेंडर पहुँचाने का काम करते थे और परिवार में पाँच भाई थे।
रिंकू सिंह को IPL में पहला मौका कब मिला?
रिंकू सिंह को 2017 में पंजाब किंग्स ने ₹10 लाख में खरीदा, लेकिन उस सीज़न कोई मैच नहीं मिला। 2018 में KKR ने ₹80 लाख में उन्हें अपने साथ जोड़ा, जिसने उनके और उनके परिवार के जीवन को बदल दिया।
रिंकू सिंह का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कैसा प्रदर्शन रहा है?
रिंकू सिंह ने भारत के लिए 48 T20I मुकाबलों में 36.94 की औसत से 702 रन बनाए हैं, जिनमें 3 अर्धशतक शामिल हैं। दिसंबर 2023 में उन्होंने पहला वनडे भी खेला और 2 वनडे मैचों में 55 रन बनाए।
रिंकू सिंह को किसने गाइड किया जब वे अंडर-16 चयन में बाहर हो रहे थे?
दो बार पहले ही दौर में बाहर होने के बाद मोहम्मद जीशान और मसूद अमीन ने रिंकू का मार्गदर्शन किया। इन दोनों के सहयोग ने रिंकू की बल्लेबाज़ी और मानसिक तैयारी को नई दिशा दी।
राष्ट्र प्रेस
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