भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता का निधन, कैंसर से लम्बी लड़ाई के बाद ली आखिरी सांस
सारांश
Key Takeaways
- रिंकू सिंह के पिता का निधन खेल जगत के लिए एक बड़ा नुकसान है।
- वे लीवर कैंसर से जूझ रहे थे और उनकी हालत गंभीर थी।
- रिंकू ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए क्रिकेट को छोड़ने का फैसला किया।
- उनके संघर्ष ने दिखाया कि सफलता के पीछे कड़ी मेहनत और बलिदान होता है।
- परिवार में आर्थिक स्थिति कमजोर थी, फिर भी उन्होंने संघर्ष किया।
ग्रेटर नोएडा, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खान चंद सिंह का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से लीवर कैंसर की गंभीर बीमारी से प्रभावित थे।
सूत्रों के अनुसार, उन्हें चौथे चरण का लीवर कैंसर था और उनकी हालत पिछले कुछ दिनों में बेहद नाजुक हो गई थी। 21 फरवरी को उनकी तबीयत और बिगड़ने पर उन्हें ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार सुबह लगभग 4:36 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह लगभग 5 बजे उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की गई। इसके बाद परिजन उनका पार्थिव शरीर लेकर घर के लिए रवाना हो गए।
पिता की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह ने टीम इंडिया का साथ छोड़कर तुरंत घर लौटने का फैसला किया। उस समय वे चेन्नई में टीम के साथ अभ्यास कर रहे थे। टी-20 विश्वकप के दौरान उन्हें अभ्यास छोड़कर परिवार के पास आना पड़ा।
पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के बाद रिंकू 25 फरवरी को फिर से चेन्नई लौटे और टीम से जुड़ गए। हालांकि 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए सुपर-8 मैच में वे प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं थे और सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के रूप में टीम में रहे।
रिंकू सिंह के परिवार में पांच भाई हैं और उनके पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए सभी भाई अपने पिता का साथ देते थे। वे लोग बाइक पर दो-दो सिलेंडर रखकर घरों और होटलों में गैस पहुंचाते थे।
क्रिकेट खेलने के लिए भी उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। मोहल्ले के दोस्तों के साथ मिलकर पैसे इकट्ठा कर गेंद खरीदी जाती थी। आज रिंकू सिंह भारतीय क्रिकेट में एक मशहूर नाम बन चुके हैं, लेकिन उनकी सफलता के पीछे उनके पिता का संघर्ष और त्याग महत्वपूर्ण रहा है। उनके निधन से परिवार और खेल जगत में शोक की लहर है।