तमिलनाडु में सीपीआई के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नू का 101 वर्ष की आयु में निधन

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तमिलनाडु में सीपीआई के वरिष्ठ नेता आर. नल्लाकन्नू का 101 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

तमिलनाडु के प्रतिष्ठित कम्युनिस्ट नेता आर. नल्लाकन्नू का 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया।

Key Takeaways

  • आर. नल्लाकन्नू का निधन 101 वर्ष की आयु में हुआ।
  • उन्होंने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
  • उनका जन्म 1925 में हुआ था।
  • उन्होंने 1943 में सीपीआई में शामिल होकर राजनीतिक करियर शुरू किया।
  • उनकी पहचान ईमानदारी और सादगी के लिए की जाती है।

चेन्नई, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और सीपीआई के आजीवन सदस्य, अनुभवी कम्युनिस्ट नेता आर. नल्लाकन्नू का बुधवार को १०१ वर्ष की आयु में निधन हो गया।

उन्होंने दोपहर १.५५ बजे राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में अपनी आखिरी सांस ली, जहां उनका गहन उपचार चल रहा था।

नल्लाकन्नू को सांस लेने में गंभीर दिक्कत के बाद १ फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिछले २४ दिनों से वह गहन देखभाल में थे, और एक मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम उनकी स्थिति पर ध्यान रख रही थी।

हॉस्पिटल के आधिकारिक बयान के अनुसार, हाल के दिनों में उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव आया था और सुबह दवा का उन पर असर लगातार कम होता गया। लगातार क्रिटिकल केयर के बावजूद मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

पिछले कुछ सप्ताह में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, कई राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने उनकी सेहत के बारे में पूछने के लिए हॉस्पिटल का दौरा किया।

सभी पार्टियों के नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया, उन्हें ईमानदारी, आइडियोलॉजिकल कमिटमेंट और सादगी का प्रतीक माना गया।

१९२५ में उस समय के अविभाजित तिरुनेलवेली जिले के थिरुवैकुंडम में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे नल्लाकन्नू अपने कॉलेज के दिनों में एक्टिविज्म की ओर आकर्षित हुए थे। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ युवाओं को सक्रिय रूप से एकजुट किया, जिसके कारण उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया।

कम्युनिस्ट विचारों से प्रेरित होकर वह १९४३ में १८ साल की उम्र में सीपीआई में शामिल हो गए और आठ दशकों से अधिक का राजनीतिक सफर तय किया। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी किसानों, खेतिहर मजदूरों और पिछड़े लोगों के हितों की लड़ाई लड़ी।

उन्होंने किसानों के अधिकारों के लिए नांगुनेरी इलाके में बड़े संघर्षों का नेतृत्व किया और छुआछूत और सामाजिक अन्याय के खिलाफ अपनी लड़ाई में डटे रहे।

आजादी के बाद भी १९४९ में राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें जेल में डाल दिया गया। पुलिस हिरासत के दौरान कथित तौर पर उन्हें टॉर्चर किया गया, जो उनके जीवन भर के इरादे को आकार देने वाला अनुभव बना।

नल्लाकन्नू ने कैदियों के अधिकारों और जेलों में शिक्षा तक पहुंच की वकालत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाद में उन्होंने १३ साल तक सीपीआई के तमिलनाडु राज्य सचिव के रूप में कार्य किया और पार्टी को कठिन राजनीतिक दौर में मार्गदर्शन दिया।

Point of View

जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
NationPress
21/04/2026

Frequently Asked Questions

आर. नल्लाकन्नू का योगदान क्या था?
आर. नल्लाकन्नू ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
उनका राजनीतिक सफर कब शुरू हुआ?
उनका राजनीतिक सफर 1943 में 18 साल की उम्र में सीपीआई में शामिल होकर शुरू हुआ।
नल्लाकन्नू को किस आंदोलन में भाग लेने के लिए कॉलेज से निकाला गया?
उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रियता के लिए कॉलेज से निकाला गया।
उनका जन्म कहां हुआ था?
उनका जन्म 1925 में तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के थिरुवैकुंडम में हुआ था।
क्या नल्लाकन्नू ने जेल में समय बिताया?
हाँ, 1949 में राजनीतिक दबाव के कारण उन्हें जेल में डाल दिया गया था।
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