7 अक्टूबर 2026
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का निधन, रांची में ली अंतिम साँस

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का निधन, रांची में ली अंतिम साँस

सारांश

एक साल में दूसरा गहरा आघात — पिता शिबू सोरेन के जाने के बाद परिवार की भावनात्मक धुरी रहीं रूपी सोरेन अब नहीं रहीं। हेमंत सोरेन के शब्दों में यह दर्द साफ झलका: 'बाबा के बाद वही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं।'

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को रांची के हिल व्यू अस्पताल में हुआ।
वह लगभग 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार थीं; गंभीर होने पर जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया था।
यह सोरेन परिवार के लिए एक वर्ष में दूसरा बड़ा आघात है — इससे पहले 4 अगस्त 2025 को पिता शिबू सोरेन का दिल्ली में निधन हुआ था।
रूपी सोरेन का विवाह 1 जनवरी 1962 को शिबू सोरेन से हुआ था; वह झारखंड आंदोलन में परिवार की मुख्य आधार स्तंभ रहीं।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने उनके निधन को झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रांची के बरियातू रोड स्थित हिल व्यू अस्पताल में निधन हो गया। वह लगभग 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके जाने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनका पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया है।

माँ को विदाई देते हुए हेमंत सोरेन के भावुक शब्द

माँ के निधन की खबर के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा — 'बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं। मां....' उनके ये भावुक शब्द परिवार और राजनीतिक हलकों में गहरी संवेदना का विषय बन गए।

निधन की परिस्थितियाँ

रूपी सोरेन पिछले कुछ समय से हिल व्यू अस्पताल में उपचाराधीन थीं। बुधवार को उनकी तबीयत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा। बाद में डॉ. दीपक गुप्ता और डॉ. उज्जवल राय ने आधिकारिक रूप से उनके निधन की जानकारी दी।

परिवार पर लगातार दूसरा बड़ा आघात

यह सोरेन परिवार के लिए महज़ एक वर्ष के भीतर दूसरा बड़ा निजी आघात है। इससे पहले 4 अगस्त 2025 को हेमंत सोरेन के पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, जिन्हें लोग दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम से जानते थे, का दिल्ली में निधन हुआ था। पिता के जाने के बाद रूपी सोरेन ही परिवार की भावनात्मक धुरी बनी रहीं।

रूपी सोरेन का जीवन और संघर्ष

रूपी सोरेन का विवाह 1 जनवरी 1962 को शिबू सोरेन से हुआ था। विवाह के बाद से वह अपने पति के दीर्घकालिक राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों में परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती रहीं। शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक नेताओं में शामिल थे और झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। गौरतलब है कि रूपी सोरेन ने दशकों तक पर्दे के पीछे रहकर उस पूरे आंदोलन को पारिवारिक आधार दिया, जो आगे चलकर झारखंड राज्य के निर्माण का आधार बना।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की श्रद्धांजलि

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने रूपी सोरेन को संघर्ष, त्याग और धैर्य की प्रतीक बताया। पार्टी ने कहा कि शिबू सोरेन के निधन के बाद भी वह पार्टी और परिवार के संघर्षों में डटकर खड़ी रहीं। पार्टी ने उनके निधन को झारखंड और देश के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि एक माँ का यह साया उठ जाना हेमंत सोरेन, उनके परिवार और पूरे झारखंड के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।

आने वाले दिनों में अंतिम संस्कार और शोक-सभाओं का क्रम जारी रहेगा, जबकि राज्य और केंद्र के नेताओं की संवेदनाएँ लगातार पहुँच रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूपी सोरेन का निधन कब और कहाँ हुआ?
रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को रांची के बरियातू रोड स्थित हिल व्यू अस्पताल में हुआ। वह लगभग 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार थीं।
हेमंत सोरेन के परिवार पर यह कौन सा बड़ा आघात है?
यह एक वर्ष के भीतर सोरेन परिवार का दूसरा बड़ा निजी आघात है। इससे पहले 4 अगस्त 2025 को हेमंत सोरेन के पिता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का दिल्ली में निधन हुआ था।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने रूपी सोरेन के निधन पर क्या कहा?
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने रूपी सोरेन को संघर्ष, त्याग और धैर्य की प्रतीक बताते हुए उनके निधन को झारखंड और देश के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया। पार्टी ने कहा कि यह हेमंत सोरेन, उनके परिवार और पूरे झारखंड के लिए बेहद पीड़ादायक है।
रूपी सोरेन का झारखंड आंदोलन से क्या संबंध था?
रूपी सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक नेता शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी के रूप में उनके लंबे राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों के दौरान परिवार की धुरी रहीं। पार्टी के अनुसार शिबू सोरेन के निधन के बाद भी वह पार्टी के संघर्षों में भावनात्मक रूप से साथ खड़ी रहीं।
राष्ट्र प्रेस
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