मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का निधन, रांची में ली अंतिम साँस
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रांची के बरियातू रोड स्थित हिल व्यू अस्पताल में निधन हो गया। वह लगभग 80 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके जाने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनका पूरा परिवार गहरे शोक में डूब गया है।
माँ को विदाई देते हुए हेमंत सोरेन के भावुक शब्द
माँ के निधन की खबर के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा — 'बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं। मां....' उनके ये भावुक शब्द परिवार और राजनीतिक हलकों में गहरी संवेदना का विषय बन गए।
निधन की परिस्थितियाँ
रूपी सोरेन पिछले कुछ समय से हिल व्यू अस्पताल में उपचाराधीन थीं। बुधवार को उनकी तबीयत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा। बाद में डॉ. दीपक गुप्ता और डॉ. उज्जवल राय ने आधिकारिक रूप से उनके निधन की जानकारी दी।
परिवार पर लगातार दूसरा बड़ा आघात
यह सोरेन परिवार के लिए महज़ एक वर्ष के भीतर दूसरा बड़ा निजी आघात है। इससे पहले 4 अगस्त 2025 को हेमंत सोरेन के पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता, जिन्हें लोग दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम से जानते थे, का दिल्ली में निधन हुआ था। पिता के जाने के बाद रूपी सोरेन ही परिवार की भावनात्मक धुरी बनी रहीं।
रूपी सोरेन का जीवन और संघर्ष
रूपी सोरेन का विवाह 1 जनवरी 1962 को शिबू सोरेन से हुआ था। विवाह के बाद से वह अपने पति के दीर्घकालिक राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों में परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती रहीं। शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक नेताओं में शामिल थे और झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। गौरतलब है कि रूपी सोरेन ने दशकों तक पर्दे के पीछे रहकर उस पूरे आंदोलन को पारिवारिक आधार दिया, जो आगे चलकर झारखंड राज्य के निर्माण का आधार बना।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की श्रद्धांजलि
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने रूपी सोरेन को संघर्ष, त्याग और धैर्य की प्रतीक बताया। पार्टी ने कहा कि शिबू सोरेन के निधन के बाद भी वह पार्टी और परिवार के संघर्षों में डटकर खड़ी रहीं। पार्टी ने उनके निधन को झारखंड और देश के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि एक माँ का यह साया उठ जाना हेमंत सोरेन, उनके परिवार और पूरे झारखंड के लिए अत्यंत पीड़ादायक है।
आने वाले दिनों में अंतिम संस्कार और शोक-सभाओं का क्रम जारी रहेगा, जबकि राज्य और केंद्र के नेताओं की संवेदनाएँ लगातार पहुँच रही हैं।