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क्या धार्मिक संवेदनशीलता ठीक है, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर रोक गलत है? : संदीप दीक्षित

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क्या धार्मिक संवेदनशीलता ठीक है, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर रोक गलत है? : संदीप दीक्षित

सारांश

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने हरिद्वार घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक को गलत बताया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी जाति विशेष के लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना उचित नहीं है। क्या यह धार्मिक संवेदनशीलता की आड़ में भेदभाव नहीं है?

मुख्य बातें

संदीप दीक्षित ने हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक को गलत बताया।
उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर भेदभाव को अस्वीकार्य माना।
धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना आवश्यक है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए।
व्यक्तिगत विरोध का अधिकार demokratik है, लेकिन हिंसक भाषा का उपयोग नहीं होना चाहिए।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के हरिद्वार घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी विशेष जाति के लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना उचित नहीं है।

राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में संदीप दीक्षित ने कहा, "हरिद्वार के घाटों पर गैर-हिंदुओं के जाने पर रोक लगाने से पहले यह सवाल उठता है कि क्या सरकार को ऐसा करने का अधिकार है? मुझे यह स्पष्ट नहीं है। भारत में कई धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे प्राइवेट होते हैं, जहाँ परंपरा के अनुसार कभी-कभी केवल एक विशेष धर्म या जाति के लोगों को ही प्रवेश दिया जाता था, लेकिन समय के साथ कई प्रथाएँ बदल चुकी हैं।"

संदीप दीक्षित ने कहा कि हम पब्लिक प्रॉपर्टी की बात कर रहे हैं, मतलब ऐसी जगहें जो सभी की हैं, प्राइवेट नहीं। ऐसे में किसी को वहाँ जाने से रोकना मेरी समझ से परे है।

दीक्षित ने कहा कि कई स्थानों पर लोगों की धार्मिक, सांस्कृतिक या राजनीतिक भावनाओं का ध्यान रखना ठीक है। जैसे कुछ क्षेत्रों में शाकाहारी रहना अनिवार्य है, कुछ जगहों पर शराब पीने की मनाही है या सिगरेट पर रोक है। यह विभिन्न लोगों की संवेदनशीलता के अनुसार समझा जा सकता है, लेकिन यदि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को आने-जाने से रोक दिया जाए, तो यह गलत है।

वहीं, जेएनयू परिसर में सोमवार रात हुई नारेबाजी पर भी संदीप दीक्षित ने अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि किसी को किसी चीज का विरोध करने का अधिकार है, यह आपका लोकतांत्रिक अधिकार है। अदालत के फैसले आते हैं और लोग उनका समर्थन कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं। यह व्यक्तिगत पसंद की बात है। लेकिन नारेबाजी या विरोध के दौरान हिंसक या धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी को भी, चाहे वह राजनीति में हो या कहीं और, चरमपंथी या हिंसक भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सार्वजनिक स्थलों पर भेदभाव के रूप में लागू करना गलत है। एक लोकतांत्रिक समाज में सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक सही है?
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी जाति विशेष के लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना गलत है।
क्या धार्मिक संवेदनशीलता को सार्वजनिक स्थलों पर लागू किया जाना चाहिए?
संदीप दीक्षित ने कहा कि धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना ठीक है, लेकिन यह सार्वजनिक स्थलों पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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