संजय निरुपम: घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीतिक दलों में मतभेद नहीं होना चाहिए
सारांश
Key Takeaways
- घुसपैठ एक गंभीर सुरक्षा मुद्दा है।
- राजनीतिक दलों को एकजुट होना चाहिए।
- आईपीएल टिकटों का मुद्दा विवादास्पद है।
- नक्सलवाद से मुक्ति पर संतोष व्यक्त किया गया।
- सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुंबई, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने कहा कि घुसपैठ के विषय पर देश के राजनीतिक दलों के बीच कोई मतभेद नहीं होना चाहिए।
मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि हमारे देश या अन्य देशों में, अवैध प्रवासियों की घुसपैठ सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि यह उस देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। हमारे देश में बांग्लादेशी प्रवासियों की समस्या न केवल रोजगार की चुनौतियां पैदा कर रही है, बल्कि यह कई सुरक्षा संबंधी सवाल भी उठाती है। ये लोग ड्रग्स के व्यापार में संलग्न हैं और आतंकवाद जैसी गतिविधियों में भी शामिल हैं।
संजय निरुपम ने पीएम मोदी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि घुसपैठ के खिलाफ एनडीए का संकल्प केवल चुनावी नारा नहीं है।
उन्होंने कहा कि घुसपैठ के मुद्दे पर देश के राजनीतिक दलों में मतभेद नहीं होना चाहिए।
कर्नाटक के विधायकों को आईपीएल के तीन मुफ्त टिकट मिलने के मामले पर उन्होंने कहा कि जब बेंगलुरु में आईपीएल का उद्घाटन मैच हुआ था, तो कांग्रेस के मंत्री ने यह मांग की थी कि सभी विधायकों को आईपीएल के 3 मुफ्त टिकट मिले और आयोजकों ने उनकी इस मांग को पूरा किया। अब यह नियम बन गया है कि आईपीएल मैचों में कर्नाटक के सभी विधायकों को 3 मुफ्त टिकट मिलेंगे। यह एक अजीब बात है। विधायकों और सांसदों को जनता की सेवा करनी चाहिए, न कि खेल आयोजनों में भाग लेना चाहिए। यदि उन्हें किसी प्रकार की सहायता चाहिए, तो उन्हें सरकार से मांग करनी चाहिए।
नक्सलवाद का जिक्र करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि अब भारत में नक्सलियों का नामोनिशान मिट गया है। 'लाल आतंकवाद' के साए से भारत अब मुक्त होता हुआ नजर आ रहा है। यह निश्चित रूप से हर्षपीएम मोदी की सरकार ने जो डेडलाइन तय की थी, उसके अंदर नक्सलवाद को समाप्त करने का कार्य किया जा रहा है।