संजय निरुपम ने ममता के यूसीसी विरोध को बताया निरर्थक, कहा यह धर्म के खिलाफ नहीं
सारांश
Key Takeaways
- यूसीसी किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है।
- ममता बनर्जी का विरोध निरर्थक है।
- समान कानून विवाह, तलाक, गोद लेने और संपत्ति बंटवारे पर लागू होगा।
- महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील।
- भारत को मध्य पूर्व में शांति की भूमिका निभानी चाहिए।
मुंबई, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में दिए गए बयानों पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है। ममता का यूसीसी का विरोध करना बिलकुल निरर्थक है।
भाजपा ने बंगाल के चुनावी घोषणा पत्र में यूसीसी को लागू करने का वादा किया है, जिसके बाद राज्य में हलचल मच गई है। स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसका विरोध कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में संजय निरुपम ने कहा कि यूसीसी किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है और न ही यह धर्म की स्वतंत्रता के खिलाफ है। यह चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर समान कानून की बात करता है: पहला, विवाह की व्यवस्था; दूसरा, तलाक की व्यवस्था; तीसरा, बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था; और चौथा, पूर्वजों की संपत्ति का बंटवारा। इन सभी मामलों में एक समान कानून होना चाहिए। इससे किसी भी धर्म को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। विवाह के तरीके और कानून सभी के लिए समान होंगे। यही कारण है कि समान नागरिक संहिता लाई जा रही है।
ईरान-अमेरिका युद्धविराम और पाकिस्तान की भूमिका पर संजय निरुपम ने कहा कि इस्लामाबाद में शांति वार्ता की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि मध्य पूर्व में शांति चाहिए, तो इजराइल, अमेरिका, ईरान और लेबनान को एक साथ बैठना होगा। पाकिस्तान की इसमें कोई भूमिका नहीं है। भारत को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
महिला आरक्षण विधेयक पर उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न वर्गों से लंबे समय से महिला सशक्तीकरण की मांग उठ रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सभी विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर बिल को पारित कराने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में अधिक से अधिक महिलाएं प्रतिनिधित्व कर सकें।