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क्या हिंदी को दुनिया में पसंद किया जाता है? संजय निषाद ने भाषा विवाद पर अपनी राय दी

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क्या हिंदी को दुनिया में पसंद किया जाता है? संजय निषाद ने भाषा विवाद पर अपनी राय दी

सारांश

संजय निषाद ने भाषा विवाद पर अपने विचार साझा किए हैं। क्या हिंदी वास्तव में दुनिया में पसंद की जाती है? जानें उनके विचार और राजनीति में उनकी भूमिका के बारे में।

मुख्य बातें

संजय निषाद ने हिंदी के वैश्विक महत्व पर जोर दिया।
भाषा विवाद में राजनीतिक दृष्टिकोण को समझना आवश्यक है।
टेक्नोलॉजी चुनावी भ्रष्टाचार को कम कर सकती है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निषाद की सख्त टिप्पणी।
राजनीतिक दलों को मूल मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

लखनऊ, 5 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में भाषा से संबंधित चल रही सियासत पर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने स्पष्ट विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि देश में भौगोलिक स्थिति के अनुसार भाषाएं विकसित हुई हैं और हिंदी को वैश्विक स्तर पर पसंद किया जाता है।

संजय निषाद ने शनिवार को राष्ट्र प्रेस से चर्चा करते हुए कहा, "देश की भौगोलिक स्थिति के अनुसार विभिन्न भाषाएं हैं और हिंदी को दुनिया भर में सराहा जाता है। मैंने स्वयं कई लोगों को देखा है जो हिंदी को पसंद करते हैं। मुझे लगता है कि इस विषय को ज्यादा तूल नहीं दिया जाना चाहिए।"

उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि फर्जी मतदाताओं को सूची से हटाना आवश्यक है। जो लोग दो स्थानों पर मतदान करते हैं, उनके नाम को एक स्थान से हटाना होगा। टेक्नोलॉजी के माध्यम से ही भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी सत्ता में आने के बाद इसी बात पर बल दिया था। मैं पूछना चाहता हूं कि यदि चुनाव आयोग टेक्नोलॉजी के माध्यम से भ्रष्टाचार पर काबू पा रहा है, तो विपक्ष क्यों चिंतित है?"

संजय निषाद ने सपा-कांग्रेस गठबंधन पर राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कांग्रेस की नीतियों के खिलाफ समाजवादी पार्टी का गठन हुआ था। वे केवल दल देखते हैं, नीतियों को नहीं। 2017 में ये दोनों एक साथ आए और साइकिल आधी रह गई। यदि वे फिर से गठबंधन करते हैं, तो साइकिल पूरी तरह से साफ हो जाएगी।"

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि सभी राजनीतिक दल अपने मूल मुद्दों और विचारधारा से भटक चुके हैं। कांग्रेस तुष्टिकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि सपा को उनके सलाहकारों ने उलझा रखा है। उन्हें दलितों, शोषितों और वंचितों की आवाज बनना चाहिए, लेकिन वे केवल सतीश मिश्रा और अमर सिंह जैसे लोगों की आवाज बन गए हैं, जिसके कारण वे पिछड़ गए हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान भी होती है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में यह समझना आवश्यक है कि भाषाई मुद्दे कैसे समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित करते हैं।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यों हिंदी को दुनिया में पसंद किया जाता है?
हिंदी एक समृद्ध भाषा है जो भारतीय संस्कृति और विविधता का प्रतिनिधित्व करती है। इसकी सरलता और समावेशिता इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाती है।
संजय निषाद ने हिंदी भाषा पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हिंदी को वैश्विक स्तर पर पसंद किया जाता है और इसे भौगोलिक स्थिति के अनुसार देखा जाना चाहिए।
क्या तकनीक से चुनावी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाया जा सकता है?
संजय निषाद का मानना है कि तकनीक का उपयोग चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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