संजय राउत का तंज: अमेरिका से ईरान की बातों में पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

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संजय राउत का तंज: अमेरिका से ईरान की बातों में पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

सारांश

संजय राउत ने ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भारत की वैश्विक स्थिति को कमजोर कर रही है।

Key Takeaways

  • ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका।
  • संजय राउत ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए।
  • भारत का वैश्विक प्रभाव घट रहा है।
  • पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति गंभीर है।
  • भारत ने अतीत में वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान और अमेरिका के बीच समझौते की बागडोर पाकिस्तान द्वारा संभालने पर भारत में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिवसेना के नेता संजय राउत ने अपनी पार्टी के समाचार पत्र 'सामना' में केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया है। उन्होंने वसीम बरेलवी के एक शेर का उल्लेख करते हुए कहा, “कोई टूटी सी कश्ती ही, बगावत पर उतर आए, तो कुछ दिन ये तूफां, सर उठाना भूल जाते हैं।”

संजय राउत ने आगे लिखा कि वसीम बरेलवी का यह शेर ईरान-अमेरिका युद्धविराम के बाद इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जो वर्तमान घटनाक्रम के लिए सही है। अमेरिका, जो खुद को एक वैश्विक महाशक्ति मानता है, उस पर ईरान जैसे एक साधारण देश ने सबक सिखाया है। ईरान का संघर्ष वहां की राष्ट्राभिमानी जनता का विद्रोह था। जब ट्रंप ने एक रात में ईरान की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने की धमकी दी, तब ईरान की लाखों जनता अपनी सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाकर सड़कों पर उतरी। ईरान का विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि वहां की डेढ़ करोड़ जनता बलिदान के लिए तैयार है, और ट्रंप को 'शांति' वार्ता के लिए मेज पर लाने में सफल रहे, लेकिन यह 'मेज' इस्लामाबाद में है, जो आतंकवादियों का प्रमुख केंद्र है।

राउत ने यह भी कहा, “अमेरिका पर इतिहास का सबसे भयानक आतंकवादी हमला करने वाला लादेन पाकिस्तान में छिपा था और अमेरिकी कमांडो ने उसे वहीं मारा था। भारत में आतंकवादी हमलों के सभी योजनाकार पाकिस्तान के संरक्षण में हैं। वही पाकिस्तान अब ईरान-अमेरिका संघर्ष में 'शांतिदूत' की भूमिका निभा रहा है।” अमेरिका ने उसे ऐसे ही मान्यता दी है। ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार की लालसा है, लेकिन युद्ध के लिए जिम्मेदार ट्रंप को ऐसा पुरस्कार देना, यह 'शांति' के विचार का अपमान है।

संजय राउत ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को एक भिखारी राष्ट्र जैसा बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा चीन जैसे देशों से उधारी लेकर जीता है और अमेरिका के पास मदद के लिए कटोरा लेकर खड़ा रहता है। यह पैसा सेना और आतंकवाद को बढ़ावा देने में खर्च किया जाता है। राउत ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इसके बावजूद अमेरिका ने पाकिस्तान को वैश्विक युद्ध रोकने के लिए श्रेय दे दिया।

राउत ने सवाल उठाया कि जब पूरा मध्य पूर्व जल रहा था, तब भारत कहां था? उन्होंने कहा कि इस वैश्विक संकट में भारत का कोई योगदान नहीं था। उन्होंने पीएम मोदी के विदेश दौरों की आलोचना करते हुए कहा कि असल में पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। राउत ने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत ने कई बार विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कोरिया, वियतनाम और कांगो जैसे देशों में भारत की शांति स्थापना में भूमिका का उल्लेख किया। “लेकिन आज, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है, तो भारत का कोई सक्रिय योगदान नहीं है। पीएम मोदी का विदेश नीति में कोई सार्थक दृष्टिकोण नहीं है।”

Point of View

NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
पाकिस्तान की भूमिका इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह अमेरिका के लिए एक सहयोगी है और ईरान के साथ तनाव के बीच मध्यस्थता कर रहा है।
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की विदेश नीति कमजोर है और भारत का वैश्विक प्रभाव घट रहा है।
क्या भारत ने कभी वैश्विक शांति में भूमिका निभाई है?
हाँ, भारत ने कई बार वैश्विक शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जैसे कोरिया युद्ध के दौरान।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कैसी है?
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और वह विदेशी कर्ज पर निर्भर है।
क्या मोदी सरकार ने विदेश नीति में सुधार किया है?
संजय राउत के अनुसार, मोदी सरकार की विदेश नीति में सुधार नहीं हुआ है और भारत की स्थिति कमजोर हो रही है।
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