क्या सरकारी कंपनियों ने बीते 12 महीनों में निवेशकों को तगड़ा डिविडेंड दिया?

सारांश
Key Takeaways
- कोल इंडिया ने सबसे अधिक 32 रुपए का डिविडेंड दिया।
- पीएफसी और आरईसी ने क्रमशः 19.5 और 19.1 रुपए का डिविडेंड दिया।
- डिविडेंड यील्ड निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड है।
- सरकारी कंपनियों में निवेश से स्थिर आय की संभावना बढ़ती है।
- यह निवेशकों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।
नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। सरकारी कंपनियों को अक्सर उत्तम डिविडेंड देने के लिए जाना जाता है और कई निवेशक स्थिर आय प्राप्त करने के लिए इन शेयरों में निवेश करते हैं, जिससे पूंजी में वृद्धि के साथ-साथ कमाई भी होती है।
डिविडेंड, कंपनी के लाभ का वह हिस्सा होता है जो इसके शेयरधारकों में वितरित किया जाता है। कंपनियाँ सामान्यतः डिविडेंड तिमाही, छमाही या फिर साल में एक बार देती हैं।
पिछले 12 महीनों में कोल इंडिया ने सबसे अधिक 32 रुपए का डिविडेंड दिया है। इसकी डिविडेंड यील्ड 8.6 प्रतिशत रही है।
डिविडेंड यील्ड, शेयरधारक को शेयर के वर्तमान बाजार मूल्य के प्रतिशत के रूप में प्राप्त होने वाली वार्षिक डिविडेंड आय को दर्शाती है। यह उन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड है जो अपने निवेश से नियमित आय अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने 19.5 रुपए का डिविडेंड दिया है और इसकी डिविडेंड यील्ड 5 प्रतिशत रही है। वहीं, आरईसी ने 19.1 रुपए का डिविडेंड निवेशकों को दिया है और इसकी डिविडेंड यील्ड 5 प्रतिशत रही है।
ऑयल और नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने पिछले एक साल में 13.5 रुपए का डिविडेंड निवेशकों को दिया है और इसकी डिविडेंड यील्ड 6 प्रतिशत रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने निवेशकों को 8.4 रुपए का डिविडेंड दिया है, लेकिन इसकी डिविडेंड यील्ड 3 प्रतिशत रही है।
नेशनल एल्यूमीनियम कंपनी ने पिछले 12 महीने में 10 रुपए का डिविडेंड दिया और इसकी डिविडेंड यील्ड 5 प्रतिशत रही है। वहीं, एनएमडीसी ने इस दौरान 4.8 रुपए का डिविडेंड दिया है, लेकिन इसकी डिविडेंड यील्ड 7 प्रतिशत रही है।
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने भी 10 रुपए का डिविडेंड दिया है, लेकिन इसकी डिविडेंड यील्ड 3 प्रतिशत रही है। इसके अलावा राइट्स लिमिटेड ने भी 10 रुपए का डिविडेंड दिया है और इसकी डिविडेंड यील्ड 4 प्रतिशत रही है।