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क्या बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में सीपीआई ने गंभीर मुद्दों पर उठाई चिंताएं?

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क्या बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में सीपीआई ने गंभीर मुद्दों पर उठाई चिंताएं?

सारांश

बजट सत्र से पहले की सर्वदलीय बैठक में सीपीआई ने कई अहम मुद्दों पर चिंता प्रकट की। उन्होंने केरल के वित्तीय संकट, आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों और विदेश नीति पर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की। यह बैठक राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की संभावना रखती है।

मुख्य बातें

केरल के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग।
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार से पारदर्शिता की अपील।
विदेश नीति में सुधार की आवश्यकता।
मनरेगा को बहाल करने की मांग।
कामकाजी वर्ग के लिए श्रम कानूनों में बदलाव की मांग।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संसद के बजट सत्र से पहले मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) का प्रतिनिधित्व राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

सीपीआई ने केरल के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की है। पार्टी का कहना है कि केंद्र द्वारा लगाए गए उधार प्रतिबंध के कारण राज्य को इस वित्तीय वर्ष में 21,000 करोड़ रुपए से अधिक का संसाधन घाटा हो रहा है। केरल जैसे राज्यों को हो रहे असाधारण वित्तीय संकट को दूर करने के लिए केंद्र सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।

विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर सीपीआई ने गहरी चिंता व्यक्त की। पी. संतोष कुमार ने कहा कि यह प्रक्रिया अब विशेष गहन निष्कासन में बदल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में मतदाता शासकों को चुनते हैं, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है, जहां शासक मतदाताओं को चुन रहे हैं। चुनाव आयोग तेजी से उन्मूलन आयोग बनता जा रहा है।

आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर पार्टी ने ऑपरेशन कगार की आलोचना की। सीपीआई का आरोप है कि इस ऑपरेशन के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार संसद और जनता के सामने इस ऑपरेशन का पूरा विवरण और वर्तमान स्थिति रखे ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

विदेश नीति पर सीपीआई ने कहा कि भारत का रुख पूरी तरह से कमजोर हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप के धमकी भरे रवैये, वेनेजुएला की स्थिति या ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं है। इससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा कमजोर हो रही है।

पार्टी ने आशा कार्यकर्ताओं के वेतन में तुरंत बढ़ोतरी की मांग दोहराई, जैसा कि पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था। मनरेगा को तुरंत बहाल करने की भी मांग की गई। सीपीआई का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी, कम आवंटन और कार्य के दिनों में कमी से ग्रामीण आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मनरेगा कृषि संकट और बेरोजगारी के समय में महत्वपूर्ण रोजगार योजना है, इसे विस्तार और पूरा वित्त पोषण मिलना चाहिए।

इसके अलावा, सीपीआई ने मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को वापस लेने, किसान विरोधी बीज बिल का विरोध करने और केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र का हिस्सा 75:25 करने की मांग की, ताकि राज्य बेहतर ढंग से कल्याण कार्यक्रम चला सकें। सीपीआई ने जोर दिया कि लोकतंत्र, संघवाद और लोगों की आजीविका की सुरक्षा के लिए बजट सत्र में इन मुद्दों पर गंभीर ध्यान दिया जाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बैठक लोकतंत्र और संघवाद के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए, सभी पक्षों को मिलकर समाधान खोजने की आवश्यकता है। यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्वदलीय बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
सर्वदलीय बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करना और सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
सीपीआई ने किन मुद्दों पर चिंता जताई?
सीपीआई ने केरल के वित्तीय संकट, आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे, और विदेश नीति की कमजोरी पर चिंता जताई।
क्या सरकार ने सीपीआई की मांगों पर ध्यान दिया?
बैठक के बाद सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन सीपीआई ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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