सेंसेक्स 570 अंक उछला, निफ्टी 22,780 के पार; कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार हरे निशान में
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी मुद्रास्फीति के उम्मीद से अधिक आंकड़ों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद 569.55 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,351.44 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। निफ्टी 50 भी 158.15 अंक यानी 0.69 प्रतिशत चढ़कर 22,780.85 तक गया। यह तेजी उस समय आई जब एशियाई और अमेरिकी बाजार दबाव में थे।
बाजार का शुरुआती कारोबार
सेंसेक्स ने 72,965.80 पर कारोबार की शुरुआत की, जो पिछले बंद भाव 72,781.89 से 183.91 अंक यानी 0.25 प्रतिशत अधिक था। निफ्टी 50 ने पिछले बंद 22,622.70 से 48.59 अंक ऊपर 22,671.30 पर शुरुआत की। बाद में कारोबार के दौरान दोनों बेंचमार्कों ने अपनी बढ़त को और विस्तार दिया।
हालांकि व्यापक बाजारों में शुरुआती दबाव देखा गया। निफ्टी स्मॉल कैप 100 सूचकांक 0.60 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी मिड कैप 100 में 0.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
सेक्टोरल प्रदर्शन: मिश्रित तस्वीर
सेक्टोरल मोर्चे पर प्रदर्शन मिश्रित रहा। निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे अधिक बढ़त वाले सूचकांक रहे, जिनमें करीब 2 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।
दूसरी ओर, निफ्टी मेटल में 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह सबसे कमजोर सूचकांक रहा। पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
वैश्विक संकेत और अमेरिकी महंगाई का असर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में मुद्रास्फीति दर सितंबर में बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई, जो अगस्त में 3.4 प्रतिशत थी। अपेक्षा से अधिक महंगाई के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में एक और ब्याज दर वृद्धि की संभावना प्रबल हुई है।
इसी चिंता के कारण बुधवार को वॉल स्ट्रीट में तीखी बिकवाली देखी गई और टेक्नोलॉजी-केंद्रित नैस्डैक सूचकांक 1.88 प्रतिशत तक टूट गया। विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर दक्षिण कोरिया और जापान के बाजारों पर भी पड़ा — निक्केई 4 प्रतिशत से अधिक और कोस्पी 7 प्रतिशत से ज्यादा नीचे रहा।
एफआईआई और डीआईआई की भूमिका
विशेषज्ञों का मत है कि भारतीय बाजार के नजरिए से एआई शेयरों में आ रहा करेक्शन सकारात्मक संकेत हो सकता है। जो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बेचकर एआई शेयरों में पैसा लगा रहे थे, उनका यह रुझान अब रुक सकता है।
बुधवार को एफआईआई शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने करीब ₹1,857 करोड़ के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने करीब ₹2,670 करोड़ की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को मजबूत समर्थन दिया।
तकनीकी संकेत और कच्चे तेल का रुख
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी ने एक मंदड़िया (बेयरिश) रुझान वाली कैंडल बनाई है, जबकि रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 41.66 पर रहा, जो इसके औसत 32.01 से ऊपर है — जो बाजार की गति में आंशिक सुधार का संकेत माना जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े आपूर्ति जोखिमों और शिपिंग लागत घटाने के लिए अमेरिकी कदमों के संभावित प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। आने वाले सत्रों में वैश्विक मैक्रो संकेत और फेडरल रिजर्व की अगली बैठक के परिणाम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।