शहाबुद्दीन रजवी का अमेरिका-ईरान बातचीत पर बयान: वार्ता से ही समाधान संभव
सारांश
Key Takeaways
- सीजफायर का स्वागत किया गया।
- युद्ध का समाधान बातचीत में है।
- इजरायल के हमलों से हजारों की मौत हुई।
- भारत ने संतुलित नीति बनाए रखी।
- महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक गलत है।
बरेली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष शहाबुद्दीन रजवी ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की बातचीत का स्वागत किया है। उन्होंने भारत की कूटनीतिक भूमिका की भी सराहना की।
शहाबुद्दीन रजवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का स्वागत करते हैं, क्योंकि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से ही होता है, लेकिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भयंकर बमबारी की। उन्होंने मानवता का भी ध्यान नहीं रखा। अस्पतालों और स्कूलों पर हमले किए गए, जिसमें 200 बच्चों की जान चली गई।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध में कई हजार लोगों की मौत हुई है। इससे पहले इजरायल के हमलों में गाजा में 75 हजार लोगों की जान गई। शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
शहाबुद्दीन रजवी ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि इस युद्ध में भारत ने संतुलित नीति बनाए रखा। भारत ने पूरी समझदारी के साथ इन 40 दिनों में अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के संबंध बहुत पुराने हैं। यही वजह है कि ईरान ने पुराने संबंधों को निभाते हुए भारत के जहाजों को होर्मुज से जाने दिया। इस दौरान लगभग आठ जहाज भारत पहुंचे।
उन्होंने आगे कहा कि अभी कुछ जहाज होर्मुज में रुके हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि वे भी जल्द भारत आएंगे, जिससे लोगों की समस्याएं समाप्त होंगी।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि वहां की कमेटी ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर जो रोक लगाई है, वह पूरी तरह गलत है। महिलाएं पहले भी धार्मिक स्थलों पर जाती रही हैं। जब वे पहले से जाती रही हैं, तो आज उन पर पाबंदी क्यों लगाई गई? एक ओर नारी शक्ति और नारी सम्मान का हवाला दिया जाता है, तो उसका सम्मान क्यों नहीं किया जाता?