क्या शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख में बदलाव किया है?

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क्या शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपने रुख में बदलाव किया है?

सारांश

तिरुवनंतपुरम के शशि थरूर ने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर अपने रुख को स्पष्ट किया। क्या ये कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद की अटकलों का जवाब है? जानिए इस महत्वपूर्ण बात पर उनके विचार और बयान।

Key Takeaways

  • शशि थरूर ने अपने रुख को स्पष्ट किया कि वह ऑपरेशन सिंदूर पर अडिग हैं।
  • उन्होंने संसद में अपनी राय व्यक्त करने में किसी पछतावे का संकेत नहीं दिया।
  • थरूर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर निर्णय स्पष्टता और जिम्मेदारी से लिए जाने चाहिए।
  • उन्होंने पाकिस्तान के साथ लंबे संघर्ष में उलझने से बचने की सलाह दी।
  • आंतरिक पार्टी मामलों पर सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता नहीं है।

तिरुवनंतपुरम, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने शनिवार को स्पष्ट किया कि “ऑपरेशन सिंदूर” पर उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने संसद में अपनी राय व्यक्त करने को लेकर किसी भी तरह के पछतावे से इनकार करते हुए यह भी खारिज किया कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ कोई कदम उठाया हो।

कोझिकोड में आयोजित केरल लिटरेचर फेस्टिवल (केएलएफ) में बोलते हुए थरूर ने कहा कि अपने पूरे संसदीय करियर में उन्होंने कभी कांग्रेस के आधिकारिक रुख के विपरीत कोई स्थिति नहीं अपनाई। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में उनका मतभेद ‘सैद्धांतिक’ था, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताया, न कि दलगत राजनीति का।

थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेदों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, खासकर दिल्ली में कांग्रेस की एक अहम बैठक में उनकी गैरमौजूदगी के बाद।

इस व्यापक विमर्श पर बात करते हुए थरूर ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता, जिम्मेदारी और राष्ट्रीय हित की भावना के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिखे गए अपने एक लेख का जिक्र करते हुए थरूर ने दोहराया कि ऐसे हमलों को बिना जवाब नहीं छोड़ा जाना चाहिए और भारत को कड़े कदम उठाने का अधिकार है। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान के साथ लंबे संघर्ष में उलझने से बचने की सलाह दी।

थरूर ने कहा कि भारत को विकास पर केंद्रित रहना चाहिए और दीर्घकालिक सैन्य टकराव से बचते हुए आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सीमित और लक्षित सैन्य कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में सरकार द्वारा अपनाए गए रुख ने उनके तर्क की मूल भावना को सही साबित किया।

थरूर ने कहा कि जब देश की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख दांव पर हो, तब राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

दिल्ली बैठक में अपनी अनुपस्थिति को लेकर उठे विवादों पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए थरूर ने कहा कि पार्टी के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक मंचों पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह एक साहित्यिक महोत्सव है, न कि राजनीतिक घोषणाओं का मंच।” उन्होंने कहा कि किसी भी चिंता को उचित मंच पर सीधे पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा।

उन्होंने मीडिया में चल रही अटकलों को स्वीकार करते हुए कहा कि कुछ रिपोर्टें सही हो सकती हैं और कुछ नहीं, लेकिन उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को सूचित कर दिया था और सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टीकरण नहीं देंगे।

Point of View

शशि थरूर का यह रुख कांग्रेस के भीतर की राजनीति को दर्शाता है। उनकी स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देती है, जो इस समय एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह देखना होगा कि क्या पार्टी नेतृत्व इस पर ध्यान देगा या नहीं।
NationPress
08/02/2026

Frequently Asked Questions

ऑपरेशन सिंदूर क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर एक राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दा है, जिस पर शशि थरूर ने अपनी राय व्यक्त की है।
शशि थरूर ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ क्या कहा?
उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई कदम उठाने से इनकार किया है और अपने रुख में बदलाव नहीं होने का दावा किया है।
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