भोपाल में आदिवासी छात्रों से दुर्व्यवहार: मिसरोद एसएचओ रतन सिंह परिहार सस्पेंड, CM मोहन यादव के आदेश पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल के मिसरोद पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) रतन सिंह परिहार को 14 अक्टूबर 2026 को निलंबित कर दिया गया और उनके विरुद्ध विभागीय जाँच के आदेश जारी किए गए। यह कार्रवाई मंगलवार को हुए एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीधे हस्तक्षेप पर की गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक दबाव तेज़ हो गया था।
घटनाक्रम: क्या हुआ मंगलवार को
मंगलवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र विंग ने भोपाल में आदिवासी छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान जब छात्रों ने 'जय जोहार' का नारा लगाया — जो आदिवासी संस्कृति और पहचान से जुड़ा एक पारंपरिक अभिवादन है — तो एसएचओ परिहार कथित तौर पर आपा खो बैठे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इंस्पेक्टर को कथित तौर पर छात्रों के विरुद्ध अपशब्दों का इस्तेमाल करते और उन्हें पीटने की धमकी देते देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद आदिवासी विधायकों, संगठनों और विपक्षी दलों ने तत्काल कार्रवाई की माँग की।
मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया
घटना मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में आते ही उन्होंने परिहार को प्रथमदृष्टया ज़िम्मेदार मानते हुए तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बुधवार को पुष्टि की कि मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर ने बुधवार को परिहार के विरुद्ध विभागीय जाँच के औपचारिक आदेश जारी किए, जिसमें घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों की विस्तृत पड़ताल का निर्देश दिया गया।
विपक्ष की माँग और राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एसएचओ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने सहित सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और संविधान का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है, न कि अपने पद का इस्तेमाल लोगों को अपमानित करने के लिए।
सिंघार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए 'जोहार' के नारे पर आदिवासी छात्रों के विरुद्ध कथित अपशब्दों के इस्तेमाल को गंभीर और निंदनीय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया: 'जोहार कोई गाली नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, पहचान, आत्म-सम्मान और गौरव का प्रतीक है' — यह अभिवादन प्यार, सम्मान और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित पुलिसकर्मियों के व्यवहार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया।
इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी पुलिस अधिकारी के कथित व्यवहार की आलोचना की और आदिवासी समुदाय के प्रति संवेदनशीलता की माँग की।
आदिवासी अस्मिता और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और 'जोहार' जैसे अभिवादन इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान के अभिन्न अंग हैं। यह घटना ऐसे समय में आई है जब राज्य में आदिवासी अधिकारों को लेकर विभिन्न समूहों की सक्रियता बढ़ रही है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ पुलिस बल में आदिवासी संवेदनशीलता के प्रशिक्षण की ज़रूरत को रेखांकित करती हैं।
आगे क्या होगा
विभागीय जाँच के नतीजे आने के बाद परिहार के विरुद्ध आगे की कार्रवाई तय होगी। विपक्ष ने एफआईआर की माँग दोहराई है, जिस पर अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले की जाँच रिपोर्ट से राज्य में पुलिस-आदिवासी संबंधों पर व्यापक बहस को और दिशा मिलने की संभावना है।