14 अक्टूबर 2026
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भोपाल में आदिवासी छात्रों से दुर्व्यवहार: मिसरोद एसएचओ रतन सिंह परिहार सस्पेंड, CM मोहन यादव के आदेश पर कार्रवाई

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भोपाल में आदिवासी छात्रों से दुर्व्यवहार: मिसरोद एसएचओ रतन सिंह परिहार सस्पेंड, CM मोहन यादव के आदेश पर कार्रवाई

सारांश

भोपाल में 'जय जोहार' के नारे पर आदिवासी छात्रों से कथित दुर्व्यवहार का वीडियो वायरल हुआ, तो CM मोहन यादव ने तुरंत दखल दिया। मिसरोद एसएचओ रतन सिंह परिहार सस्पेंड, विभागीय जाँच शुरू। विपक्ष एफआईआर की माँग पर अड़ा है।

मुख्य बातें

मिसरोद पुलिस स्टेशन के एसएचओ रतन सिंह परिहार को 14 अक्टूबर 2026 को निलंबित किया गया।
निलंबन का कारण: गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीधे हस्तक्षेप के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर ने विभागीय जाँच के आदेश दिए।
वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर को कथित तौर पर अपशब्द इस्तेमाल करते और पीटने की धमकी देते दिखाया गया।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एफआईआर दर्ज करने की माँग की; कांग्रेस ने भी पुलिस के आचरण की निंदा की।

भोपाल के मिसरोद पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) रतन सिंह परिहार को 14 अक्टूबर 2026 को निलंबित कर दिया गया और उनके विरुद्ध विभागीय जाँच के आदेश जारी किए गए। यह कार्रवाई मंगलवार को हुए एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव के सीधे हस्तक्षेप पर की गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक दबाव तेज़ हो गया था।

घटनाक्रम: क्या हुआ मंगलवार को

मंगलवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र विंग ने भोपाल में आदिवासी छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान जब छात्रों ने 'जय जोहार' का नारा लगाया — जो आदिवासी संस्कृति और पहचान से जुड़ा एक पारंपरिक अभिवादन है — तो एसएचओ परिहार कथित तौर पर आपा खो बैठे।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इंस्पेक्टर को कथित तौर पर छात्रों के विरुद्ध अपशब्दों का इस्तेमाल करते और उन्हें पीटने की धमकी देते देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद आदिवासी विधायकों, संगठनों और विपक्षी दलों ने तत्काल कार्रवाई की माँग की।

मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया

घटना मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में आते ही उन्होंने परिहार को प्रथमदृष्टया ज़िम्मेदार मानते हुए तत्काल निलंबित करने का आदेश दिया। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बुधवार को पुष्टि की कि मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जाँच के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भोपाल पुलिस कमिश्नर ने बुधवार को परिहार के विरुद्ध विभागीय जाँच के औपचारिक आदेश जारी किए, जिसमें घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों की विस्तृत पड़ताल का निर्देश दिया गया।

विपक्ष की माँग और राजनीतिक प्रतिक्रिया

विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एसएचओ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने सहित सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और संविधान का सम्मान करने की उम्मीद की जाती है, न कि अपने पद का इस्तेमाल लोगों को अपमानित करने के लिए।

सिंघार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए 'जोहार' के नारे पर आदिवासी छात्रों के विरुद्ध कथित अपशब्दों के इस्तेमाल को गंभीर और निंदनीय बताया। उन्होंने स्पष्ट किया: 'जोहार कोई गाली नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, पहचान, आत्म-सम्मान और गौरव का प्रतीक है' — यह अभिवादन प्यार, सम्मान और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित पुलिसकर्मियों के व्यवहार के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया।

इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने भी पुलिस अधिकारी के कथित व्यवहार की आलोचना की और आदिवासी समुदाय के प्रति संवेदनशीलता की माँग की।

आदिवासी अस्मिता और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और 'जोहार' जैसे अभिवादन इस समुदाय की सांस्कृतिक पहचान के अभिन्न अंग हैं। यह घटना ऐसे समय में आई है जब राज्य में आदिवासी अधिकारों को लेकर विभिन्न समूहों की सक्रियता बढ़ रही है।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ पुलिस बल में आदिवासी संवेदनशीलता के प्रशिक्षण की ज़रूरत को रेखांकित करती हैं।

आगे क्या होगा

विभागीय जाँच के नतीजे आने के बाद परिहार के विरुद्ध आगे की कार्रवाई तय होगी। विपक्ष ने एफआईआर की माँग दोहराई है, जिस पर अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले की जाँच रिपोर्ट से राज्य में पुलिस-आदिवासी संबंधों पर व्यापक बहस को और दिशा मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि विपक्ष एफआईआर की माँग कर रहा है। यह घटना रेखांकित करती है कि मध्य प्रदेश जैसे आदिवासी-बहुल राज्य में भी पुलिस प्रशिक्षण में सांस्कृतिक संवेदनशीलता की कमी बनी हुई है। जब तक विभागीय जाँच पारदर्शी नतीजे नहीं देती और आपराधिक कार्रवाई पर सरकार स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तब तक यह कार्रवाई प्रतीकात्मक लग सकती है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल में एसएचओ को सस्पेंड क्यों किया गया?
मिसरोद पुलिस स्टेशन के एसएचओ रतन सिंह परिहार को एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान आदिवासी छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों पर निलंबित किया गया। वायरल वीडियो में वे कथित तौर पर छात्रों के विरुद्ध अपशब्द इस्तेमाल करते और पीटने की धमकी देते दिखे।
'जय जोहार' नारे का क्या महत्व है?
'जोहार' आदिवासी समुदाय का एक पारंपरिक अभिवादन है जो प्यार, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के अनुसार, यह आदिवासी संस्कृति, पहचान और आत्म-सम्मान का प्रतीक है — इसे गाली मानना सांस्कृतिक अपमान है।
इस मामले में मुख्यमंत्री ने क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना का संज्ञान लेते हुए एसएचओ परिहार को प्रथमदृष्टया ज़िम्मेदार मानकर तत्काल निलंबन का आदेश दिया। उनके आदेश पर भोपाल पुलिस कमिश्नर ने विभागीय जाँच शुरू की है।
विपक्ष की क्या माँग है?
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने निलंबन को अपर्याप्त बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की माँग की है। कांग्रेस ने भी पुलिस अधिकारी के कथित आचरण की आलोचना की और जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा आदेशित विभागीय जाँच जारी है। जाँच रिपोर्ट के आधार पर परिहार के विरुद्ध अतिरिक्त कार्रवाई तय होगी। एफआईआर पर सरकार का औपचारिक रुख अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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