लाल किले के पास AQIS हमले पर UN रिपोर्ट को BJP सांसद श्रृंगला का समर्थन, बांग्लादेश सीमा पर जताई चिंता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने गुरुवार, 13 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र की 'एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम' की उस रिपोर्ट का पुरज़ोर समर्थन किया, जिसमें लाल किले के निकट हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट की ज़िम्मेदारी 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) को सौंपी गई है। श्रृंगला ने साथ ही यह भी आगाह किया कि बांग्लादेश के साथ लगती खुली सीमा के ज़रिये आतंकवादी तत्व भारत में प्रवेश कर सकते हैं।
UN रिपोर्ट में क्या कहा गया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सौंपी गई आतंकवाद-संबंधी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पिछले नवंबर में लाल किले के पास हुए विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी और इसके लिए आधिकारिक रूप से AQIS को ज़िम्मेदार ठहराया गया था। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि AQIS अब बिखरे हुए अलग-थलग समूहों से आगे बढ़कर एक विकेंद्रीकृत आतंकी नेटवर्क के रूप में उभर रहा है — जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और जटिल चुनौती है।
श्रृंगला की प्रतिक्रिया
पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी श्रृंगला, जो अमेरिका में भारत के राजदूत और विदेश सचिव के पद पर रह चुके हैं, ने कहा, 'मुझे लगता है कि अगर उन्होंने कहा है कि AQIS भारत में संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें लाल किले के पास धमाके के लिए ज़िम्मेदार लोग भी शामिल हैं, तो निश्चित रूप से हमें इसे गंभीरता से लेना होगा और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करनी होगी कि हमारे देश में इन आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों को अनुमति न मिले।'
UN सुरक्षा परिषद की विशेषज्ञ टीम की साख का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, 'ये वे लोग हैं जो आतंकवाद-रोधी मामलों के विशेषज्ञ हैं, जो आतंकवादी संगठनों से निपटने में माहिर हैं, और इसलिए वे इन मुद्दों पर बहुत शोध और जाँच करते हैं।'
बांग्लादेश सीमा पर चिंता
बांग्लादेश में पूर्व राजदूत रह चुके श्रृंगला ने पड़ोसी देश में बढ़ती आतंकी गतिविधियों के लिए वहाँ के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस सरकार ने 'कई वांछित आतंकवादियों को रिहा कर दिया था और ऐसा माहौल बनाया था जो ऐसे आतंकवादियों के लिए उस देश में पैर जमाने के अनुकूल था।'
यह ऐसे समय में आया है जब UN रिपोर्ट में भी यह चेतावनी दी गई थी कि AQIS बांग्लादेश का उपयोग वहाँ अपने सेल स्थापित करने के लिए कर सकता है। गौरतलब है कि जमात-ए-इस्लामी का बांग्लादेश में अभी भी 'काफी प्रभाव' बना हुआ है — एक तथ्य जिसे श्रृंगला ने विशेष रूप से रेखांकित किया।
सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौती
श्रृंगला ने खुली सीमाओं को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी: 'खुली सीमाओं के कारण ये लोग भारत में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए हमें बहुत सावधान और सतर्क रहना होगा ताकि हमारी सुरक्षा और अखंडता से कोई समझौता न हो।' उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करना ज़रूरी है, क्योंकि उनके अपने क्षेत्र में आतंकवादियों का सक्रिय होना उनके हित में भी नहीं है।
आने वाले दिनों में भारत-बांग्लादेश सीमा प्रबंधन और AQIS की बढ़ती उपस्थिति को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।