क्या सोनिया गांधी ने आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स के मानदेय को दोगुना करने की मांग की?

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क्या सोनिया गांधी ने आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स के मानदेय को दोगुना करने की मांग की?

सारांश

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आंगनवाड़ी और आशा वर्कर्स के मानदेय को दोगुना करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इन महिलाओं को अत्यधिक कम पारिश्रमिक मिलता है, जो उनके कार्यभार और महंगाई के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है। क्या यह समस्या सरकार की ओर से नजरअंदाज की जा रही है?

Key Takeaways

  • सोनिया गांधी ने आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय की मांग की।
  • महिलाओं को बेहद कम मानदेय मिलता है।
  • तीन लाख रिक्तियों का मुद्दा भी उठाया गया।
  • सरकार को समय पर मानदेय सुनिश्चित करना चाहिए।
  • महिलाओं का सशक्तिकरण भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश है।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी महिला कर्मियों के मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि देशभर में सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने वाली इन महिलाओं को अत्यधिक कम मानदेय मिल रहा है।

मंगलवार को राज्यसभा में उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत कार्यरत सामुदायिक संसाधन व्यक्ति, महिला सशक्तिकरण की रीढ़ हैं। फिर भी, उन्हें अत्यधिक बोझ, कम मानदेय और सीमित सामाजिक सुरक्षा के साथ काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने इन महिला वर्कर्स के मानदेय में केंद्र सरकार के अंशदान को दोगुना करने की मांग की।

सोनिया गांधी ने इन महिला कर्मियों की परिस्थितियों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आज की हकीकत यह है कि इन योजनाओं को लागू करने वाली महिलाएं अत्यधिक काम के बोझ और बेहद कम पारिश्रमिक के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि देशभर में आशा कार्यकर्ता टीकाकरण, जन–सक्रियता, मातृ स्वास्थ्य और परिवार कल्याण जैसे अत्यंत संवेदनशील और आवश्यक कार्यों को निभा रही हैं। इसके बावजूद, उन्हें आज तक स्वयंसेवक के रूप में ही रखा गया है। उनका मानदेय अत्यंत कम है और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान भी सीमित हैं।

सोनिया गांधी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की स्थिति पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को महज 4,500 रुपये और सहायिकाओं को 2,250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जो मौजूदा महंगाई और कार्यभार के मुकाबले बेहद अपर्याप्त है। कम मानदेय के अलावा, उन्होंने एकीकृत बाल विकास सेवा में बड़े पैमाने पर रिक्तियों का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में एकीकृत बाल विकास सेवा के अंतर्गत विभिन्न स्तरों पर लगभग तीन लाख पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण देशभर में लाखों बच्चों और माताओं को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक देखभाल जैसी आवश्यक सेवाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब ये पद भरे भी जाते हैं, तब भी वे जनसंख्या मानकों के अनुरूप नहीं होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2011 के बाद से जनगणना के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

अपने वक्तव्य में उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि राज्यों के साथ मिलकर सभी मौजूदा रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए और सभी कर्मियों को समय पर मानदेय सुनिश्चित किया जाए। सोनिया गांधी ने सरकार से कहा कि अग्रिम पंक्ति की इन महिला कर्मियों के लिए केंद्र सरकार के अंशदान को दोगुना किया जाए। 2,500 से अधिक आबादी वाले गांवों में एक अतिरिक्त आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति की जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या दोगुनी की जाए ताकि पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ प्रारंभिक बाल शिक्षा को भी सशक्त किया जा सके।

अपने संबोधन के अंत में सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा कि इस कार्यबल को सशक्त करना, उसका विस्तार करना और उसे पूरा समर्थन देना केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य में किया गया एक महत्वपूर्ण निवेश है।

Point of View

बल्कि यह उन आवश्यक सेवाओं का भी सवाल है जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों को पहुंचाई जा रही हैं। सोनिया गांधी के इस बयान से स्पष्ट होता है कि सरकार को इन महिलाओं के कार्य और उनके मानदेय को उचित मान्यता देनी चाहिए।
NationPress
15/02/2026

Frequently Asked Questions

सोनिया गांधी ने किस मुद्दे पर बात की?
उन्होंने आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी महिला कर्मियों के मानदेय को दोगुना करने की मांग की।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कितना मानदेय मिलता है?
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 4,500 रुपये और सहायिकाओं को 2,250 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है।
सोनिया गांधी ने कितनी रिक्तियों का जिक्र किया?
उन्होंने एकीकृत बाल विकास सेवा के अंतर्गत लगभग तीन लाख रिक्तियों का जिक्र किया।
क्यों जरूरी है आशा वर्कर्स का मानदेय बढ़ाना?
इन महिलाओं का काम स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए उनका मानदेय बढ़ाना आवश्यक है।
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