दक्षिण चीन सागर में अमेरिका की निगरानी में कमी से चीन की गतिविधियों में वृद्धि: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- दक्षिण चीन सागर में अमेरिका की निगरानी में कमी आई है।
- चीन ने एंटेलोप रीफ पर अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं।
- यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट अब अमेरिका का एकमात्र प्रमुख कैरियर है।
- चीन का विस्तार समुद्री व्यापार पर प्रभाव डाल सकता है।
- अमेरिका को अपनी रणनीति में सुधार करने की आवश्यकता है।
नेप्यीडॉ, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दुनिया का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग धीरे-धीरे चीन के प्रभाव में आता हुआ प्रतीत हो रहा है, जबकि अमेरिका का ध्यान पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों की वजह से बंटा हुआ है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।
मेकोंग न्यूज में लिन मौंग के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में एंटेलोप रीफ को चीन ने एक कृत्रिम किले में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब निगरानी कमज़ोर हो जाती है, तो क्या परिणाम हो सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने पिछले संघर्षों के दौरान अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को अन्य क्षेत्रों में भेज दिया है, जिस कारण दक्षिण चीन सागर में निगरानी उड़ानों में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2025 के अंत की तुलना में है। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए, चीन ने एंटेलोप रीफ पर अपनी गतिविधियाँ बढ़ा दी हैं और वहां कोरल (मूंगा चट्टान) की खुदाई तेज कर दी है।
मौंग के अनुसार, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट अब इस क्षेत्र में अमेरिका का एकमात्र प्रमुख कैरियर स्ट्राइक ग्रुप रह गया है, जो चीन को रोकने की क्षमता रखता है। पहले यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन भी इस क्षेत्र में तैनात थे, लेकिन अब वे मध्य पूर्व के जल क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं।
मेकोंग न्यूज की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और अन्य वाणिज्यिक स्रोतों से प्राप्त सैटेलाइट तस्वीरों में चीन की योजनाओं का बड़ा पैमाना स्पष्ट होता है। जो स्थान पहले एक छोटा ठिकाना था, अब वह एक बड़े भूभाग में तब्दील हो रहा है, जिसका क्षेत्रफल छह वर्ग किलोमीटर से अधिक हो चुका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजीनियरों ने रीफ के किनारों को सीधा कर वहां रनवे बनाने की योजना बनाई है, जिसकी लंबाई 2,700 मीटर से अधिक हो सकती है। यह विस्तार इतना बड़ा होगा कि वहां लड़ाकू विमान, निगरानी विमान और भारी बमवर्षक विमान भी उतर सकेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, एंटेलोप रीफ में हो रहे इस परिवर्तन से यह स्पष्ट होता है कि चीन पश्चिमी पारासेल क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह वही इलाका है, जिससे दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री व्यापार गुजरता है।
2016 के हेग ट्रिब्यूनल ने चीन के "नाइन-डैश लाइन" दावों को खारिज कर दिया था, फिर भी रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन अपनी गतिविधियों के माध्यम से इन दावों को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
यह एक रणनीतिक कदम है: क्षेत्र पर अधिकार करना, पड़ोसी देशों को धमकाना और समुद्री कानूनों को अपने अनुसार बदलना। यदि अमेरिका अपनी गश्त और मौजूदगी को मजबूत नहीं करता है, तो यह विस्तार और भी बढ़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की ये कार्रवाइयाँ धीरे-धीरे "समुद्री क्षेत्र पर कब्जा" जैसी स्थिति का निर्माण कर रही हैं।