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एसटी हसन: मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है

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एसटी हसन: मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है

सारांश

मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में शामिल होने का आह्वान किया है। उनकी टिप्पणी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के बयान के संदर्भ में आई है।

मुख्य बातें

मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में भाग लेना चाहिए।
शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के बयान पर प्रतिक्रिया।
महिला आरक्षण बिल में अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए प्रावधान होना चाहिए।
भाषा के आधार पर विभाजन की राजनीति की आलोचना।
राजनीति में विकास और सकारात्मकता पर जोर दिया गया।

मुरादाबाद, १५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता एसटी हसन ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में सक्रिय रूप से योगदान देना चाहिए

मुरादाबाद में सपा नेता ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि मुझे नहीं पता कि शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी किस शरिया कानून का हवाला दे रहे हैं। इस्लाम मुस्लिम महिलाओं को राजनीतिक गतिविधियों से नहीं रोकता। मैं मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में कदम रखने के लिए प्रेरित करता हूं। उन्हें अपनी आवाज उठानी चाहिए और सक्रिय रहना चाहिए।

एसटी हसन ने कहा कि शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी को अपने बयान पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित बिल की निंदा की, जिसमें एक मई से टैक्सी और ऑटो चालक के लिए मराठी भाषा में बात करना अनिवार्य करने का प्रावधान है।

हसन ने कहा कि यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है कि हमारी राजनीति अब विभाजन की राजनीति में बदल गई है। पहले हम हिंदू-मुस्लिम के आधार पर विभाजित हुए, फिर जातियों के आधार पर, और अब क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। महाराष्ट्र में मराठी को अनिवार्य करने का निर्णय लोगों के बीच नया विभाजन उत्पन्न करेगा।

उन्होंने कहा कि जो लोग मराठी नहीं बोल पाएंगे, उनके साथ अन्याय होगा। उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है और वहां से निष्कासित किया जा सकता है। हम कब तक लोगों को बांटते रहेंगे? हमें नफरत की राजनीति को छोड़कर प्रेम और विकास की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। महंगाई और बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए, न कि भाषा के आधार पर विभाजन होना चाहिए।

महिला आरक्षण बिल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को ३३ प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है, जिसका सभी समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें मुस्लिम महिलाओं, अल्पसंख्यकों, एससी/एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए उचित प्रावधान होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं का आरक्षण चुनाव आयोग के माध्यम से नहीं, बल्कि पार्टियों द्वारा ३३ प्रतिशत टिकट देकर लागू किया जाना चाहिए।

बिहार में सम्राट चौधरी के सीएम बनने पर एसटी हसन ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जिस डाल पर बैठे थे, उसी को काट दिया गया है। अब जदयू का भविष्य संकट में है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने नीतीश कुमार के नाम पर चुनाव जीते थे, लेकिन अब उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। जदयू का अंत निश्चित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज में समरसता और विकास की आवश्यकता पर भी बल देता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसटी हसन ने मुस्लिम महिलाओं के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।
क्या एसटी हसन ने महाराष्ट्र सरकार के बिल की आलोचना की?
हाँ, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्तावित बिल की निंदा की है, जिसमें मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है।
महिला आरक्षण बिल के बारे में एसटी हसन का क्या कहना है?
उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का बिल सभी का समर्थन प्राप्त कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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