30 सितंबर 2026
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शुगर सेक्टर में बड़ा बदलाव: प्रह्लाद जोशी बोले — 98% गन्ना भुगतान, 5 साल के बकाया का दौर खत्म

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शुगर सेक्टर में बड़ा बदलाव: प्रह्लाद जोशी बोले — 98% गन्ना भुगतान, 5 साल के बकाया का दौर खत्म

सारांश

गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बड़ा दावा किया — मौजूदा सीज़न में 98% भुगतान पूरा, इथेनॉल खरीद 38 करोड़ से 1,200 करोड़ लीटर पर पहुँची और ₹16,500 करोड़ के सॉफ्ट लोन से बरसों का बकाया चुकाया गया। पर किसान अभी भी सड़कों पर हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 30 सितंबर 2026 को शुगर सेक्टर सुधारों का ब्योरा दिया।
मौजूदा शुगर सीज़न में 98% और पिछले सीज़न में 99% गन्ना भुगतान पूरा — पहले 5 साल तक बकाया रहता था।
इथेनॉल खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,200 करोड़ लीटर हुई।
मिल मालिकों को ₹16,500 करोड़ का सॉफ्ट लोन दिया गया ताकि पुराना बकाया चुकाया जा सके।
मिलों के लिए 14 दिन में गन्ना भुगतान अनिवार्य किया गया; इथेनॉल भुगतान के 15-20 दिनों में किसानों को प्राथमिकता देने की एडवाइजरी जारी।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में गन्ना किसानों के चल रहे आंदोलन के बीच मोदी सरकार के शुगर सेक्टर सुधारों का विस्तृत ब्योरा दिया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा शुगर सीज़न में 98 प्रतिशत और पिछले सीज़न में 99 प्रतिशत गन्ना भुगतान किसानों को हो चुका है — जबकि पहले 5 साल तक भी बकाया नहीं मिलता था।

मंत्री का किसानों को संदेश

जोशी ने बताया कि किसान उनके आवास पर आए थे, लेकिन वे दिल्ली में व्यस्तताओं के कारण उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा, 'आने से पहले भी मैंने बताया था कि आपको इस धूप में आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। आप आ जाइए, हम बात करेंगे। ऐसा मैंने कहा था, क्योंकि मुझे मिलने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर ने उन्हें सूचित किया था कि किसान पहले आंदोलन करना चाहते हैं, उसके बाद वार्ता के लिए आएंगे।

इथेनॉल क्रांति: 38 करोड़ से 1,200 करोड़ लीटर तक का सफर

जोशी ने इथेनॉल उत्पादन में हुई बढ़ोतरी को शुगर सेक्टर की बेहतरी का सबसे बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के आने के बाद इथेनॉल, जो पहले 38 करोड़ लीटर खरीदा जाता था, वह अब 1,200 करोड़ लीटर हो गया है।' उनके अनुसार, शुगर मिलों में उत्पादित लगभग सभी इथेनॉल की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जा रही है, और कारखानों ने अलग-अलग स्रोतों से भी इथेनॉल उत्पादन शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि इथेनॉल की बढ़ी हुई खरीद ने शुगर मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को समय पर भुगतान के रूप में मिला है। मंत्री ने यह भी बताया कि इथेनॉल के औद्योगिक उपयोग के विस्तार पर भी सरकार विचार कर रही है।

14 दिन में भुगतान और ₹16,500 करोड़ का सॉफ्ट लोन

जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मिलों को गन्ना भुगतान 14 दिनों के भीतर करना अनिवार्य किया है। इसके अतिरिक्त, मिल मालिकों को ₹16,500 करोड़ का बेहद कम ब्याज वाला सॉफ्ट लोन दिया गया, जिससे दो-तीन वर्षों से लंबित किसानों का बकाया चुकाया गया। उन्होंने कहा कि इथेनॉल खरीद के एवज में मिलों को मिले भुगतान को 15-20 दिनों के भीतर पहली प्राथमिकता पर किसानों तक पहुँचाने की एडवाइजरी भी जारी की गई है।

एफआरपी में निरंतर बढ़ोतरी

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि पीएम मोदी के कार्यकाल में उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में लगातार बढ़ोतरी की गई है, जिससे गन्ना किसानों की आय में सुधार हुआ है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में किसानों की बकाया राशि को लेकर वर्षों से असंतोष रहा है। आलोचकों का कहना है कि केंद्र की नीतियों के बावजूद राज्य-स्तर पर क्रियान्वयन में अभी भी अंतराल बना हुआ है।

आगे की राह

जोशी ने संकेत दिया कि किसानों से जल्द सीधी बातचीत होगी और उनकी शेष माँगों पर विचार किया जाएगा। शुगर सेक्टर में इथेनॉल के औद्योगिक उपयोग के विस्तार को लेकर सरकार की नीतिगत पहल भविष्य में मिलों और किसानों दोनों के लिए अतिरिक्त आय का ज़रिया बन सकती है। सरकार का दावा है कि संरचनात्मक सुधारों ने इस सेक्टर को 5 साल के बकाया के दुष्चक्र से बाहर निकाल दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि ज़मीन पर खाई अभी पूरी तरह नहीं पटी है। असली सवाल यह है कि शेष 2% बकाया किन किसानों का है और वे कब से प्रतीक्षा में हैं — यह आँकड़ा सरकार ने साझा नहीं किया। इथेनॉल नीति निस्संदेह एक संरचनात्मक सुधार है, पर इसका लाभ मुख्यतः बड़ी मिलों को मिला है; छोटे और सीमांत किसान अभी भी राज्य-स्तरीय देरी के शिकार बनते हैं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रह्लाद जोशी ने शुगर सेक्टर में कौन-से सुधारों का दावा किया है?
जोशी ने दावा किया कि मोदी सरकार ने FRP में निरंतर बढ़ोतरी, 14 दिनों में गन्ना भुगतान की अनिवार्यता और इथेनॉल खरीद में भारी वृद्धि जैसे सुधार किए हैं। इन कदमों के परिणामस्वरूप मौजूदा सीज़न में 98% और पिछले सीज़न में 99% गन्ना भुगतान पूरा हो चुका है।
इथेनॉल उत्पादन में क्या बदलाव आया है?
सरकार के अनुसार, मोदी सरकार के कार्यकाल में इथेनॉल की सरकारी खरीद 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 1,200 करोड़ लीटर हो गई है। इससे शुगर मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरी है और किसानों को समय पर भुगतान संभव हुआ है।
सरकार ने मिलों को कितना सॉफ्ट लोन दिया और किसलिए?
सरकार ने मिल मालिकों को ₹16,500 करोड़ का बेहद कम ब्याज दर वाला सॉफ्ट लोन दिया, ताकि दो-तीन वर्षों से लंबित गन्ना किसानों का बकाया चुकाया जा सके। यह कदम उन दिनों में उठाया गया जब मिलें वित्तीय संकट में थीं और किसान भुगतान का इंतजार कर रहे थे।
गन्ना किसानों का आंदोलन क्यों हो रहा था?
रिपोर्टों के अनुसार, गन्ना किसान अपनी लंबित माँगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिलने पहुँचे थे। जोशी ने बताया कि उन्होंने किसानों को पहले से आमंत्रित किया था, लेकिन जिला प्रशासन ने सूचित किया कि किसान पहले आंदोलन करना चाहते थे।
गन्ना भुगतान की नई समयसीमा क्या है?
सरकार ने मिलों के लिए गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य किया है। इसके अतिरिक्त, इथेनॉल खरीद के एवज में मिलों को मिले भुगतान को 15-20 दिनों के भीतर पहली प्राथमिकता के आधार पर किसानों तक पहुँचाने की एडवाइजरी जारी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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