शुगर सेक्टर में बड़ा बदलाव: प्रह्लाद जोशी बोले — 98% गन्ना भुगतान, 5 साल के बकाया का दौर खत्म
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में गन्ना किसानों के चल रहे आंदोलन के बीच मोदी सरकार के शुगर सेक्टर सुधारों का विस्तृत ब्योरा दिया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा शुगर सीज़न में 98 प्रतिशत और पिछले सीज़न में 99 प्रतिशत गन्ना भुगतान किसानों को हो चुका है — जबकि पहले 5 साल तक भी बकाया नहीं मिलता था।
मंत्री का किसानों को संदेश
जोशी ने बताया कि किसान उनके आवास पर आए थे, लेकिन वे दिल्ली में व्यस्तताओं के कारण उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा, 'आने से पहले भी मैंने बताया था कि आपको इस धूप में आंदोलन करने की जरूरत नहीं है। आप आ जाइए, हम बात करेंगे। ऐसा मैंने कहा था, क्योंकि मुझे मिलने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टर ने उन्हें सूचित किया था कि किसान पहले आंदोलन करना चाहते हैं, उसके बाद वार्ता के लिए आएंगे।
इथेनॉल क्रांति: 38 करोड़ से 1,200 करोड़ लीटर तक का सफर
जोशी ने इथेनॉल उत्पादन में हुई बढ़ोतरी को शुगर सेक्टर की बेहतरी का सबसे बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी के आने के बाद इथेनॉल, जो पहले 38 करोड़ लीटर खरीदा जाता था, वह अब 1,200 करोड़ लीटर हो गया है।' उनके अनुसार, शुगर मिलों में उत्पादित लगभग सभी इथेनॉल की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जा रही है, और कारखानों ने अलग-अलग स्रोतों से भी इथेनॉल उत्पादन शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि इथेनॉल की बढ़ी हुई खरीद ने शुगर मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को समय पर भुगतान के रूप में मिला है। मंत्री ने यह भी बताया कि इथेनॉल के औद्योगिक उपयोग के विस्तार पर भी सरकार विचार कर रही है।
14 दिन में भुगतान और ₹16,500 करोड़ का सॉफ्ट लोन
जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मिलों को गन्ना भुगतान 14 दिनों के भीतर करना अनिवार्य किया है। इसके अतिरिक्त, मिल मालिकों को ₹16,500 करोड़ का बेहद कम ब्याज वाला सॉफ्ट लोन दिया गया, जिससे दो-तीन वर्षों से लंबित किसानों का बकाया चुकाया गया। उन्होंने कहा कि इथेनॉल खरीद के एवज में मिलों को मिले भुगतान को 15-20 दिनों के भीतर पहली प्राथमिकता पर किसानों तक पहुँचाने की एडवाइजरी भी जारी की गई है।
एफआरपी में निरंतर बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि पीएम मोदी के कार्यकाल में उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में लगातार बढ़ोतरी की गई है, जिससे गन्ना किसानों की आय में सुधार हुआ है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में किसानों की बकाया राशि को लेकर वर्षों से असंतोष रहा है। आलोचकों का कहना है कि केंद्र की नीतियों के बावजूद राज्य-स्तर पर क्रियान्वयन में अभी भी अंतराल बना हुआ है।
आगे की राह
जोशी ने संकेत दिया कि किसानों से जल्द सीधी बातचीत होगी और उनकी शेष माँगों पर विचार किया जाएगा। शुगर सेक्टर में इथेनॉल के औद्योगिक उपयोग के विस्तार को लेकर सरकार की नीतिगत पहल भविष्य में मिलों और किसानों दोनों के लिए अतिरिक्त आय का ज़रिया बन सकती है। सरकार का दावा है कि संरचनात्मक सुधारों ने इस सेक्टर को 5 साल के बकाया के दुष्चक्र से बाहर निकाल दिया है।