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इथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों की आय दोगुनी: प्रदीप भंडारी ने मेरठ दौरे में केजरीवाल के दावों को नकारा

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इथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों की आय दोगुनी: प्रदीप भंडारी ने मेरठ दौरे में केजरीवाल के दावों को नकारा

सारांश

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी मेरठ के गाँवों में पहुँचे और किसानों से बात कर केजरीवाल के इथेनॉल-विरोधी दावों को खारिज किया। उनका कहना है कि मक्का किसानों की आय दोगुनी हुई और गन्ना किसानों को ₹25,000 करोड़ का भुगतान 15 दिनों में मिल रहा है — यह बहस E-20 लक्ष्य से पहले राजनीतिक रूप से और तीखी होती जा रही है।

मुख्य बातें

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने मेरठ के फाफुंडा और चंदासारा गाँवों में किसानों से मिलकर EBP कार्यक्रम के असर का जायज़ा लिया।
भंडारी के दावे के अनुसार, मक्का किसानों को अब ₹2,400 प्रति क्विंटल मिल रहा है, जो पहले की तुलना में 'लगभग दोगुना' है।
गन्ना किसानों को ₹25,000 करोड़ का भुगतान 15 दिनों के भीतर मिलने का दावा किया गया।
पिछले 3 वर्षों में 20 करोड़ से अधिक दो पहिया और 3-4 करोड़ चार पहिया वाहन 15% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रहे हैं; वाहन क्षति का कोई बड़ा मामला नहीं।
यह दौरा AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल के E-20 विरोधी भाषण के एक दिन बाद हुआ।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 3 अगस्त 2026 को मेरठ जिले के फाफुंडा और चंदासारा गाँवों का दौरा कर केंद्र सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के जमीनी असर का जायज़ा लिया। गन्ने और चावल की खेती करने वाले किसानों से सीधी बातचीत के बाद भंडारी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के उन दावों को सिरे से खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इथेनॉल मिश्रण से किसानों और वाहनों को नुकसान होता है।

मुख्य घटनाक्रम

भंडारी का यह दौरा शनिवार, 2 अगस्त को केजरीवाल द्वारा E-20 मुद्दे पर दिए गए भाषण के एक दिन बाद हुआ। भंडारी ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट में कहा, 'अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार के इंजन को नुकसान पहुँचाता है, हालाँकि सच्चाई यह है कि इससे कार के त्वरण में सुधार होता है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले तीन वर्षों से 3 से 4 करोड़ से अधिक चार पहिया वाहन और 20 करोड़ से अधिक दो पहिया वाहन लगभग 15 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रहे हैं, और अब तक वाहन क्षति का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है।

किसानों को हो रहे फायदे

भंडारी के अनुसार, मेरठ के किसानों ने बताया कि EBP कार्यक्रम शुरू होने के बाद से गन्ने की फसल का समय पर भुगतान मिल रहा है, जिससे साहूकारों पर उनकी निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम ने किसानों के लिए फसल बेचने का एक अतिरिक्त बाज़ार खोल दिया है, जो पारंपरिक चैनलों के पूरक के रूप में काम कर रहा है।

मक्का किसानों के संदर्भ में भंडारी ने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रण में मक्के का योगदान 40 प्रतिशत है और किसानों को अब मक्के की कीमत ₹2,400 प्रति क्विंटल मिल रही है, जिसका अर्थ है कि उनकी आय 'लगभग दोगुनी' हो गई है। चावल की खेती के बारे में उन्होंने कहा कि भारत में माँग से अधिक चावल उत्पादन होता है और अतिरिक्त चावल का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय मिल रही है।

गन्ना किसानों को ₹25,000 करोड़ का भुगतान

भंडारी ने यह भी दावा किया कि गन्ने के किसानों को अब ₹25,000 करोड़ का पूरा भुगतान 15 दिनों के भीतर मिल रहा है। उनके अनुसार, इससे ग्रामीण स्तर पर आर्थिक आत्मविश्वास मजबूत हुआ है और ऋण-निर्भरता में कमी आई है।

केजरीवाल के दावों पर BJP का पलटवार

केजरीवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए भंडारी ने कहा, 'केजरीवाल ने कहा था कि मिश्रण से किसानों को नुकसान होगा। असल में सबसे ज़्यादा फायदा तो किसानों को ही हो रहा है।' उन्होंने मक्का, चावल और गन्ना उगाने वाले किसानों को इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी बताया। इसके साथ ही भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जो कोई इथेनॉल मिश्रित पेट्रोलियम का विरोध कर रहा है, वह 'उन विदेशी शक्तियों का समर्थन कर रहा है जो देश के मध्यम वर्ग और किसानों का समर्थन नहीं करतीं।'

आगे क्या

यह राजनीतिक बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब केंद्र सरकार E-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) के लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। भंडारी के इस दौरे को BJP की उस व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर जाकर सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की आवाज़ को राजनीतिक विमर्श में केंद्र में लाया जाए। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच इथेनॉल नीति पर बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि सहज जमीनी पड़ताल — और यह अंतर महत्वपूर्ण है। किसानों की आय दोगुनी होने और ₹25,000 करोड़ के 15-दिन भुगतान के दावे BJP के बयान पर आधारित हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। केजरीवाल के इंजन-क्षति वाले दावे तकनीकी रूप से विवादास्पद हो सकते हैं, लेकिन किसानों को वास्तविक लाभ पहुँचाने की जवाबदेही के लिए सरकारी आँकड़ों की पारदर्शी जाँच ज़रूरी है। E-20 लक्ष्य की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच यह बहस नीतिगत कम और चुनावी अधिक नज़र आती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम क्या है?
EBP यानी इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम केंद्र सरकार की वह पहल है जिसमें पेट्रोल में एक निश्चित प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। इथेनॉल मुख्यतः गन्ना, मक्का और अतिरिक्त चावल से बनाया जाता है, जिससे किसानों को अपनी फसल के लिए एक अतिरिक्त बाज़ार मिलता है।
प्रदीप भंडारी ने मेरठ दौरे में क्या दावे किए?
भंडारी ने दावा किया कि मक्का किसानों को ₹2,400 प्रति क्विंटल मिल रहा है जो पहले से लगभग दोगुना है, गन्ना किसानों को ₹25,000 करोड़ का भुगतान 15 दिनों के भीतर हो रहा है, और इथेनॉल मिश्रण से साहूकारों पर किसानों की निर्भरता कम हुई है। ये दावे उनकी मेरठ के फाफुंडा व चंदासारा गाँवों में किसानों से बातचीत पर आधारित हैं।
केजरीवाल ने इथेनॉल मिश्रण पर क्या कहा था?
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार, 2 अगस्त को दिए भाषण में कहा था कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार के इंजन को नुकसान पहुँचाता है और किसानों को इससे नुकसान होगा। भंडारी ने इन दोनों दावों को गलत बताया।
क्या इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को नुकसान होता है?
भंडारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 20 करोड़ से अधिक दो पहिया और 3-4 करोड़ चार पहिया वाहन 15% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रहे हैं और अब तक वाहन क्षति का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। उनका दावा है कि इससे वाहन के त्वरण में सुधार होता है।
EBP कार्यक्रम से कौन-से किसान सबसे ज़्यादा लाभान्वित हो रहे हैं?
भंडारी के अनुसार, मक्का, गन्ना और चावल उगाने वाले किसान इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। इथेनॉल मिश्रण में मक्के का योगदान 40 प्रतिशत है और अतिरिक्त चावल का उपयोग भी इथेनॉल उत्पादन में हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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