ई20 फ्यूल पॉलिसी पर केजरीवाल के विरोध मार्च को BJP ने बताया 'राजनीतिक', बांकीपुर हार पर NDA ने की समीक्षा की बात
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के बीच 4 अगस्त 2026 को संसद परिसर में राजनीतिक बयानबाज़ी का तापमान चढ़ा रहा। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा केंद्र सरकार की ई20 फ्यूल पॉलिसी के विरोध में प्रधानमंत्री आवास तक प्रस्तावित मार्च को 'निराधार राजनीतिक कदम' करार दिया। साथ ही, बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में एनडीए की हार पर गठबंधन नेताओं ने जनादेश स्वीकारते हुए आत्म-समीक्षा की ज़रूरत मानी।
ई20 पॉलिसी पर BJP का पलटवार
BJP सांसद तरुण चुघ ने केजरीवाल के प्रस्तावित विरोध मार्च को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त जानकारी के बेबुनियाद बातें करना उचित नहीं है। चुघ के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को लेकर सभी आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण पहले ही किए जा चुके हैं और नीति लागू करने में कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल का उत्पादन मक्का, गन्ना और अन्य कृषि फसलों से हो रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है। चुघ ने आरोप लगाया कि केजरीवाल को 'न देश की चिंता है, न वाहन चालकों की — वे केवल अपनी राजनीतिक ज़मीन मज़बूत करना चाहते हैं।'
हर्ष मल्होत्रा का तीखा हमला
BJP सांसद हर्ष मल्होत्रा ने केजरीवाल पर और तीखे शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केजरीवाल स्वयं को 'अराजकतावादी' बताते रहे हैं और उनके ताज़ा बयान उसी छवि को पुष्ट करते हैं। मल्होत्रा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि सबसे बड़े अराजकतावादी राहुल गांधी हैं या अरविंद केजरीवाल। उनके अनुसार, वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी कर इस मुद्दे को विवाद बनाना केवल राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।
बांकीपुर हार पर NDA की प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों को 'कुछ हद तक चौंकाने वाला' ज़रूर बताया, लेकिन साथ ही कहा कि लोकतंत्र में हार-जीत सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जनता का फ़ैसला सर्वोपरि है और पार्टी को हार के कारणों की गंभीर समीक्षा करनी होगी।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी जनादेश स्वीकार करते हुए विपक्ष को इस नतीजे पर 'ज़रूरत से ज़्यादा उत्साहित' न होने की सलाह दी। उन्होंने 2009 के बिहार उपचुनाव का उदाहरण दिया, जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने 17 में से 12 सीटें गँवाई थीं, लेकिन इसके बाद 2010 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन ने लगभग 89 प्रतिशत स्ट्राइक रेट से जीत दर्ज की थी। उनका कहना था कि उपचुनाव के नतीजों को अंतिम राजनीतिक तस्वीर नहीं मानना चाहिए।
संसद गतिरोध और उत्तर प्रदेश चढ़ावा मामला
केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने उत्तर प्रदेश के चढ़ावा मामले पर कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर FIR दर्ज हो चुकी है, SIT जाँच कर रही है और कई गिरफ़्तारियाँ भी हुई हैं। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि यदि कोई मुद्दा संसद में उठाना हो तो लोकसभा अध्यक्ष को नियमानुसार नोटिस दिया जाए। बघेल ने आरोप लगाया कि विपक्ष का असली उद्देश्य जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित होने से रोकना है।
BJP सांसद अशोक कुमार मित्तल ने संसद के गतिरोध पर कहा कि जब विपक्ष स्वयं सदन में हंगामा करता है, तो सरकार पर संसद न चलने देने का आरोप लगाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सुचारु संसदीय कार्यवाही की पक्षधर है और अंततः जनता तय करेगी कि बाधा के लिए कौन ज़िम्मेदार है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में कई अहम विधेयकों पर चर्चा लंबित है और विपक्ष व सत्तापक्ष के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। ई20 पॉलिसी पर केजरीवाल का प्रस्तावित मार्च और बांकीपुर के नतीजे — दोनों मिलकर आने वाले हफ्तों में राजनीतिक बहस को और तेज़ करने का काम कर सकते हैं।