ई-20 विवाद: दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने केजरीवाल की आईआईटी डिग्री पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने शनिवार, 1 अगस्त को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे ई-20 ईंधन सहित तकनीकी विषयों पर भ्रामक बयान दे रहे हैं — और यह तब, जब वे स्वयं को आईआईटी स्नातक बताते हैं। मल्होत्रा की यह प्रतिक्रिया केजरीवाल के उस टाउन हॉल भाषण के बाद आई जिसमें उन्होंने ई-20 ईंधन को लेकर आपत्तियाँ जताई थीं।
मल्होत्रा का सीधा हमला
मल्होत्रा ने कहा, '2010 से ही देश अरविंद केजरीवाल को बार-बार यह दावा करते हुए सुनता आ रहा है कि वह आईटी से स्नातक हैं। हालांकि, ई-20 पर ही नहीं बल्कि कई तकनीकी मुद्दों पर भी उनके बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने आईटीआई स्तर की शिक्षा भी प्राप्त नहीं की है।' उन्होंने केजरीवाल पर ई-20 यानी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
100 क्षतिग्रस्त वाहनों की चुनौती
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने अपनी पहले की चुनौती दोहराई कि करोड़ों वाहनों वाले देश में केजरीवाल कम से कम 100 ऐसे वाहन पेश करें जो वास्तव में ई-20 ईंधन के कारण क्षतिग्रस्त हुए हों या जिनके इंजन खराब हो गए हों। मल्होत्रा के अनुसार, ऐसे किसी प्रमाण के अभाव में केजरीवाल के दावे निराधार हैं।
ई-20 के फायदे: वायु गुणवत्ता और विदेशी मुद्रा बचत
मल्होत्रा ने कहा कि यदि केजरीवाल ने राजनीतिक प्रचार की जगह तथ्यों की पड़ताल की होती, तो उन्हें पता चलता कि ई-20 ईंधन के बढ़ते उपयोग से अकेले दिल्ली की वायु गुणवत्ता में लगभग 30 प्रतिशत का सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत ईंधन आयात पर प्रतिवर्ष ₹16 लाख करोड़ से अधिक विदेशी मुद्रा खर्च करता है।
नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार, एथेनॉल के बढ़ते उपयोग से पहले ही वर्ष में लगभग ₹1 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, एथेनॉल सम्मिश्रण से गन्ना किसानों की आय में लगभग ₹50,000 करोड़ की वृद्धि होने का अनुमान है।
आईआईटी डिग्री पर सवाल
मल्होत्रा ने तर्क दिया कि यदि केजरीवाल ने वास्तव में आईआईटी से शिक्षा प्राप्त की होती, तो वे एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध कभी नहीं करते — एक ऐसा ईंधन जो राष्ट्रीय आर्थिक बचत में योगदान देता है, किसानों की आय बढ़ाता है और नागरिकों को स्वच्छ हवा प्रदान करता है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केंद्र सरकार 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रही है।
आगे क्या
आम आदमी पार्टी की ओर से मल्होत्रा के आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ई-20 नीति पर यह राजनीतिक टकराव दिल्ली में पर्यावरण और ऊर्जा नीति को लेकर जारी बहस को और तीखा करता है।