29 जुलाई 2026
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ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल का बड़ा हमला: 30 करोड़ पुराने वाहन खतरे में, कंपनियों पर दबाव का आरोप

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ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल का बड़ा हमला: 30 करोड़ पुराने वाहन खतरे में, कंपनियों पर दबाव का आरोप

सारांश

केजरीवाल ने ई-20 पेट्रोल नीति पर केंद्र को घेरा — 30 करोड़ पुराने वाहनों के खतरे में होने का दावा, 29 कंपनियों से जवाब माँगा, 9 ने फोन पर जोखिम स्वीकारा पर लिखित गारंटी से इनकार किया। ED-CBI धमकी से कंपनियाँ चुप हैं — यह आरोप है AAP का। 1 अगस्त का टाउनहॉल रोकने की भी कोशिश का दावा।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल ने 29 जुलाई 2026 को दावा किया कि 2023 से पहले निर्मित करीब 30 करोड़ वाहन ई-20 पेट्रोल से प्रभावित हो सकते हैं।
केजरीवाल ने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखा; किसी ने लिखित जवाब नहीं दिया, लेकिन 9 कंपनियों के अधिकारियों ने कथित तौर पर फोन पर तकनीकी जोखिम स्वीकार किए।
आरोप है कि कंपनियों को ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई की धमकी देकर चुप कराया जा रहा है — केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इथेनॉल की कम कैलोरिक वैल्यू से वाहनों के माइलेज में कमी आने की आशंका जताई गई है।
1 अगस्त को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में दोपहर 12 बजे 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20' आयोजित होना है; पुलिस द्वारा इसे रोकने की कोशिश का भी आरोप।
केजरीवाल ने PM मोदी से ई-20 नीति पर पुनर्विचार और तकनीकी रिपोर्टें सार्वजनिक करने की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 29 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की ई-20 पेट्रोल नीति पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि 2023 से पहले निर्मित देश के करीब 30 करोड़ वाहन इस इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के उपयोग से तकनीकी और आर्थिक नुकसान का सामना कर सकते हैं। उनका यह भी आरोप है कि केंद्र सरकार ऑटोमोबाइल कंपनियों पर इन जोखिमों को सार्वजनिक न करने का दबाव बना रही है।

केजरीवाल के मुख्य आरोप

केजरीवाल के अनुसार, उन्होंने पेट्रोल-चालित दोपहिया और चारपहिया वाहन बनाने वाली 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखकर पूछा था कि क्या 2023 से पहले निर्मित उनके वाहनों में ई-20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित है। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कंपनियाँ ई-20 को सुरक्षित बताती हैं और बाद में वाहन खराब होता है या माइलेज घटता है, तो क्या वे उपभोक्ताओं को हर्जाना देने को तैयार होंगी।

उनका दावा है कि किसी भी कंपनी ने लिखित जवाब नहीं दिया। हालाँकि, 9 कंपनियों के अधिकारियों से फोन पर बातचीत हुई, जिन्होंने कथित तौर पर निजी तौर पर स्वीकार किया कि पुराने वाहनों में ई-20 के उपयोग से इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुँच सकता है और माइलेज भी घट सकता है।

ED, CBI और आयकर कार्रवाई की धमकी का आरोप

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कंपनियों को कथित तौर पर चेतावनी दी जा रही है कि यदि उन्होंने ई-20 के संभावित नुकसान के बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी दी, तो उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों की कार्रवाई कराई जा सकती है या उनके संयंत्रों पर असर डाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी आशंका के चलते कंपनियाँ लिखित गारंटी देने से बच रही हैं।

गौरतलब है कि ये आरोप केजरीवाल ने लगाए हैं और केंद्र सरकार अथवा संबंधित ऑटोमोबाइल कंपनियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

30 करोड़ वाहन मालिकों पर असर का दावा

केजरीवाल के अनुसार देश में लगभग 22 करोड़ दोपहिया और 8 करोड़ चारपहिया वाहन — यानी कुल करीब 30 करोड़ वाहन2023 से पहले निर्मित हैं। उनका तर्क है कि यदि इन वाहनों में ई-20 पेट्रोल का व्यापक उपयोग अनिवार्य किया जाता है, तो बड़ी संख्या में वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने इथेनॉल-मिश्रित ईंधन की कैलोरिक वैल्यू पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इथेनॉल की कैलोरिक वैल्यू सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है, जिससे वाहन का माइलेज घट सकता है। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि ई-20 नीति से न तो विदेशी मुद्रा की अपेक्षित बचत होगी और न ही किसानों को पर्याप्त लाभ मिलेगा। आलोचकों का यह भी कहना है कि इथेनॉल उत्पादन से पर्यावरण और भूजल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंकाएँ जताई जाती रही हैं।

नेशनल टाउनहॉल रोकने की कोशिश का आरोप

केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पुलिस के माध्यम से 1 अगस्त को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में दोपहर 12 बजे आयोजित होने वाले 'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20' कार्यक्रम को रुकवाना चाहती है। उनका दावा है कि बुकिंग शुल्क जमा हो चुका है और रसीद भी जारी हो चुकी है, इसके बावजूद पुलिस ने क्लब प्रशासन पर बुकिंग रद्द करने का दबाव बनाया।

केजरीवाल ने कहा कि जब क्लब प्रशासन ने बुकिंग रद्द करने से इनकार किया, तब पुलिस ने आयोजकों से अलग से अनुमति लेने की बात कही। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी इनडोर कार्यक्रम के लिए सामान्यतः अलग से पुलिस अनुमति की आवश्यकता नहीं होती और यह कदम लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास है।

केजरीवाल की माँग और आगे का रुख

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ई-20 नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने माँग की कि ई-20 पेट्रोल से जुड़े सभी तकनीकी तथ्यों और परीक्षण रिपोर्टों को सार्वजनिक किया जाए तथा उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्वेच्छा से यह फैसला वापस नहीं लेती, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों का प्रयोग करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी असली ताकत इस तथ्य में है कि 29 में से किसी भी कंपनी ने लिखित में ई-20 की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी — यह चुप्पी अपने आप में सवाल खड़े करती है। केंद्र सरकार ने अभी तक कोई तकनीकी खंडन नहीं किया है, जो इस बहस को और गहरा करता है। ई-20 नीति पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा के नाम पर लाई गई थी, लेकिन यदि 30 करोड़ पुराने वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान होता है तो इसकी सामाजिक कीमत बड़ी होगी। असली जवाबदेही तब तय होगी जब सरकार स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण रिपोर्टें सार्वजनिक करे — जो अब तक नहीं हुई हैं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-20 पेट्रोल क्या है और यह पुराने वाहनों के लिए समस्या क्यों है?
ई-20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। केजरीवाल के अनुसार, 2023 से पहले निर्मित वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम इस उच्च इथेनॉल सामग्री के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए थे, जिससे पुर्जों को नुकसान और माइलेज में कमी आ सकती है।
केजरीवाल ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को क्यों पत्र लिखा?
उन्होंने 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से पूछा कि क्या उनके 2023 से पहले बने वाहनों में ई-20 सुरक्षित है और क्या वे किसी नुकसान की स्थिति में उपभोक्ताओं को हर्जाना देने को तैयार हैं। किसी भी कंपनी ने लिखित जवाब नहीं दिया, हालाँकि 9 कंपनियों के अधिकारियों ने कथित तौर पर फोन पर जोखिम स्वीकार किए।
केजरीवाल ने कंपनियों की चुप्पी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
केजरीवाल का आरोप है कि कंपनियों को कथित तौर पर चेतावनी दी गई है कि सार्वजनिक खुलासे पर ED, CBI और आयकर विभाग की कार्रवाई हो सकती है। केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
'नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20' क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
यह 1 अगस्त को दोपहर 12 बजे कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला AAP का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। केजरीवाल का आरोप है कि पुलिस ने क्लब प्रशासन पर बुकिंग रद्द करने का दबाव बनाया, जिसे क्लब ने अस्वीकार कर दिया।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
उन्होंने माँग की है कि ई-20 पेट्रोल से जुड़ी सभी तकनीकी रिपोर्टें और परीक्षण परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ। साथ ही उन्होंने PM मोदी से इस नीति पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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